(छंद-
माधवी मरहट्ठा )
दक्षिण
हस्त
रूप विराट महालक्ष्मी का, सभी
शक्तियों का आधार।
श्रीमद् देवी महाभागवत अरु शाक्त परंपरानुसार।1।
अष्टादशभुज स्वरूप अनुपम, धारे अस्त्र
हेतु कल्याण।
धारे सभी प्राप्त अस्त्रों से, किया
पापियों का संहार।2।
करने को संहार शक्ति का, सत-रज-तम का
अस्त्र त्रिशूल,
और नियंत्रण करने वाला, अन्यायी पर अस्त्र कुठार।3।
दृढता व अटूट विश्वास का, अस्त्र वज्र था इंद्र प्रदत्त,
विष्णु प्रदत्त प्रबंध
पराक्रम, हेतु चक्र अरु गदा प्रहार।4।
करने विजय बुराई पर माँ, लिए सदैव है
अस्त्र खड्.ग,
संकल्प शक्ति अरु लक्ष्य भेदने, धनुष-बाण का किया विचार।5।
श्री, ऐश्वर्य,
शुद्धता का है, कमल हाथ में बना प्रतीक,
सुख समृद्धि और अभय के लिए, माँ दे आशीर्वाद हजार।6।
पाने को मां का अशीष हो, मन निर्मल
हो शुद्ध शरीर,
दक्षिण हस्ते अस्त्र धरे नौ, करने पूर्ण ध्येय अवतार।7।
वाम हस्त
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वाम हस्त में धारे नौ विध, अस्त्र
प्रतीक, भाव, संदाय।
सृजन और संयम का द्योतक, हाथ कमंडलु का अध्याय।1।
अमृत पात्र न कभी
रिक्त हो, धारा माँ ने उसको वाम,
वार रोकने भक्तों की रक्षा को खेटक बने उपाय।2।
सत्य और अनुशासन न्यायिक, शक्ति,
दंड अरु पाश प्रतीक,
घंट नकारात्मक ऊर्जा को, सकारात्मक को' शंख सहाय।3।
धनवर्षा, समृद्धि-ऐश्वर्य
व धान्य हेतु है बना प्रतीक,
दक्षिण वाम हस्त अष्टादश माँ
के अस्त्रों के संकाय।।4।
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