समाचार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
समाचार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

9 मार्च 2026

भारत पुरुषों का टी-20 वर्ल्‍डकप 2026 चैंपियन


                            ज़ज्‍़बा, ज़ुनून और जोश के चर्चे लम्‍बे समय तक होते रहेंगे            

मीडिया की अटकलें, अनुमान और आँकलन लगभग फतांसी और झूठे निकले। भारतीय टीम ने अपना प्‍लान गुप्‍त रखा और मीडिया के अनुमान से अलग एक या दो अहम बदलाव ने हमें चेम्पियन बना दिया। हर खिलाड़ी का योगदान क़ाबिले तारीफ़ रहा, चाहे वह 11 खिलाड़ि‍यों में शामिल रहा या नहीं, पर फील्डिंग में उसने एक्‍स्‍ट्रा खिलाड़ी के रूप में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया। हर खिलाड़ी पर कप्‍तान का विश्‍वास और अपनापन देखने लायक था। संजू सेमसन और ईशान किशन की टूर्नामेंट में वापसी सबसे ज्‍यादा प्रभावी रही जिन्‍होंने इस टूर्नामेंट में जीत की नींव रखी। जहाँ रिंकू सिंह ने अपने पिता को खोया वहीं उन्‍होंने देश के प्रति प्रेम और क्रिकेट के ज़ूनून ने उनकी बेहतरीन फील्डिंग ने सबका दिल जीता। अभिषेक तीन डक के कारण सर्वाधिक चर्चे में रहे पर कप्‍तान और चयन समिति ने उन पर अंत तक विश्‍वास रखा, उन्‍हें हौसला दिया और सभी अटकलों के पीछे धकेल, अभिषेक ने इस सम्‍मान को फाइनल में सही साबित किया। उन्‍होंने प्‍लेयर ऑफ द टूर्नामेंट संजू सेमसन के साथ मिलकर स्‍वयं ने गेंदों में सबसे तेज 50 रन बना कर अपनी वापिसी सिद्ध की। साथ ही पहले विकेट के लिए तेज 98 रन जोड़े और पावर प्‍ले में टीम ने वर्ल्‍ड कप में सर्वाधिक 92 रन बनाने का कीर्तिमान बनाया।            

        यह टूर्नामेंट कुछ और घटनाओं के कारण भी चर्चा में रहेगा। जैसे, पाकिस्‍तान की टीम की भी देश की राजनीति की गीदड़ भभकी की तरह बड़े बोल भी गुब्‍बारे की तरह फूट गए। पाकिस्‍तान के खिलाड़ि‍यों के बड़े बोल ‘भारत सेमीफाइनल में भी नहीं पहुँचेगा’ सबसे ज्‍यादा चर्चे में रहा। हेंड शेकिंग (हाथ मिलाने) बदस्‍तूर रहा, सेमीफाइनल से बाहर होने पर खिलाड़ि‍यों का रोना, देश की खीज उनके सभी खिलाड़ि‍यों के खराब प्रदर्शन पर 50-50 लाख रु. का जुर्माना उनकी निम्न मानसिकता का परिचय थी। इस शर्मनाक इतिहास के पन्‍ने का काल रंग से रँगने से रोका जा सकता था, यदि सच्‍चाई गले उतरती और वह बांग्‍लादेश की तरह बहिष्‍कार करने के अपने बयान पर कायम रहता तो इस शर्मनाक स्थिति से बच सकता था।

        फाइनल के जोश में अर्शदीप द्वारा स्‍टम्‍प पर फैंकी गेंद न्‍यूजीलैंड के खिलाड़ी मिचेल के कंधे पर लगना भी थोड़ा सा तनाव दे गया, पर खेलभावना के चलते एक दूसरे से हाथ मिला कर सॉरी कह कर उसे धो दिया। न्‍यूजीलेंड के कप्‍तान सेंटनर के बड़े बोल ‘अरबों लोगों का दिल तोड़ेंगे’ ओवर कोन्फिडेंस के चलते धूल में मिल गया और 96 रन की करारी हार ने हर पचासवें व्‍यक्ति द्वारा क्रिकेट खेलने वाले उनके देश के 50 लाख लोगों का दिल जरूर टूटा होगा। एक ओवर में तीन आरंभिक भारतीय खिलाड़ि‍यों को आउट करने से पहले न्‍यूजींलेंड की टीम अपनी हार निश्चित कर चुकी थी। एक बार भी वर्ल्‍डकप नहीं जीतने वाली न्‍यूजीलेंड टीम के हीरो साइफर्ट, एलन, फिलिप्स, मिचेल, सेंटनर में केवल साइफर्ट और सेंटनर ही 30+ रन बना सके, बाकी ताश के पत्‍तों की तरह ढह गए। 96 रन से मिली हार भी लंबे समय तक न्‍यूजीलैंड को सताएगी।

        संयुक्‍त मेजबान श्रीलंका की टीम के कप्‍तान निशांका का संघर्ष भी इस वर्ल्‍डकप में सराहनीय रहा, जो हारने और सेमीफाइनल से बाहर होने पर भी उनकी अंतिम पारी लंबे समय तक याद की जाती रहेगी।

        सुपर 8 से पहले ही सर्वाधिक 13 विकेट लेने वाले यूएसए के गेंदबाल शैडली वेन शाल्विक ने अपने डेब्‍यू टूर्नामेंट को सही साबित किया और पाकिस्‍तान के चार खिलाड़ि‍यों को आउट कर कीर्तिमान रचा। इंडियन टीम के जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती ने ही संयुक्‍त 14 विकेट ले कर इस कीर्तिमान को तोड़ा। जिम्‍बाव्‍वे ने पूर्व चेंपियन आस्‍ट्रेलिया और वेस्‍टइंडीज को आउट कर सेमीफाइनल में जगह बना कर अपनी तैयारी दिखाई।

        पाकिस्‍तान के साहिबजादा फरहान ने सेमीफाइनल से पूर्व ही दो शतक सहित 383 रन का सर्वाधिक रन का कीर्तिमान बना कर विराट कोहली का रिकार्ड तोड़ा। सेमी फाइनल व फाइनल में अपने सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन (बैटर और विकेटकीपिंग में) और सर्वाधिक रन 321 बनाने वाले संजू सेमसन दूसरे स्‍थान पर रह कर टूर्नामेंट में प्‍लेयर आफ द टूर्नामेंट बने।     

फाइनल में ईशान किशन के दो अविसमरणीय केच, अक्षर का बाउंड्री बचाते हुए शिवम दुबे को गेंद देकर आउट करना और तीन बोल्‍ड के साथ ईशान के अनोखे केच ने 4 विकेट के साथ प्‍लेयर आफ द मैच बुमराह ने सिद्ध किया कि वे विश्‍व के सर्वश्रेष्‍ठ गेंदबाज हैं।

और भी कई श्रेष्‍ठ प्रदर्शनों के साथ पुरुषों के टी-20 वर्ल्‍डकप 2026 में ज़ज्‍़बा, ज़ुनून और जोश के चर्चे लम्‍बे समय तक होते रहेंगे। 86 लाख से अधिक लोगों द्वारा यह टूर्नामेंट अहमदाबाद के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्‍टेडियम में देखा गया और 60 लाख से ज्‍यादा जियो हॉटस्टार पर स्‍ट्रीमिंग किसी भी टी20 में सर्वाधिक दर्शकों की उपस्थिति एवं देखने का एक कीर्तिमान बन गया है।

(कुछ और कीर्तिमान इसमें जोड़ते रहेंगे।)


-आकुल 

 

 

             

11 नवंबर 2025

नवछंद 'मुक्‍तकंठा /मुक्‍ताहार प्रतिष्‍ठापित

10. 11.2025 को आदरणीय छंदकार श्री राकेश मिश्र द्वारा हिंदी के साहित्‍यांगन मुक्‍तक-लोक में संयोजित तरंगिनी छंद समारोह एवं समीक्षा 597 में आपके मित्र का नवछंद #मुक्तकंठा / मुक्ताहार को प्रस्तावित कर एक नई ऊर्जा प्रदान की, जिसे समारोह अध्यक्ष श्री राज किशोर मिश्र मोहमदी जी ने उत्साहित हो छंद पर अपनी रचना से पुण्या:वाचन कर इसका स्वागत किया। आदर. मिश्र जी ने भी मुक्तकंठा छंद पर रचना से इसे दिशा दी। परिणामस्वरूप मुक्तक-लोक पटल पर इसे हाथों हाथ लिया गया और 27 विद्वज्जनों ने इसे लाइक्स एवं रचना रच कर समारोह को ऊर्जस्वी बना दिया। लोगों ने मेरे दिए गए नामकरण मुक्‍तकंठा / मुक्‍ताहार को ही स्वीकार किया। मुक्तक-लोक के संस्थापक अध्यक्ष और परमादरणीय प्रो. विश्वम्भर शुक्ल ने सशक्त रचना रच मुझे जो आशीर्वाद दिया है उसका आभारी रहूँगा। उन्होंने भी छंद का यही नाम रख अपनी नवछंद का अनुमोदन करते हुए स्वीकृति की मोहर लगाई। मुझे पूरा विश्वास है कि मुक्तक-लोक और अन्यत्र भी इसका प्रयोग कर इस नवछंंद को रचनाकार पोषण करेंगे। समारोह में उपस्थित सभी मनीषियों की भूूरिभूरि प्रशंसा एवं आभार जिन्होंने एक स्वर में इसे स्वीकार किया और अपनी लेखनी से इस छंद को प्रतिष्ठापित किया। 

मुक्‍तक लोक तरंगिनी छंद समारोह एवं समीक्षा 597 के समारोह की पोस्‍ट 

शीर्ष पोस्‍ट- 3<>मुक्‍तक-लोक<>तरंगिनी छंद एवं समीक्षा समारोह-597<>सोमवार, 10 नवम्‍बर, 2025

ध्यानाकर्षण – प्रदत्‍त छंद मुक्तक लोक के संचालक / स्तंभकार  डॉं गोपाल कृष्ण भट्ट ‘आकुल’ जी की नवीन खोज है। उक्त नवछंद के प्रारूप एवं छंद के नामकरण के सम्बन्ध में सभी सक्रिय सदस्यों के विचार सादर आमंत्रित हैं। छंद का नाम सदन की प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करेगा। मुक्तक लोक से जुड़े सभी कलमकारों का सहर्ष स्वागत है। आपकी प्रतिक्रिया एवं रचना मुक्तक लोक पटल को गौरवान्वित करेगा। जय जय माता शारदे  जय जय मुक्तक लोक – छंदकार राकेश मिश्र

आज का चयनित छंद –मुक्तकंठा / मुक्ताहार आदि आदि

शिल्प विधान- दोहा मुक्तक+अर्ध रोला अर्थात दोहा मुक्तक की चार पंक्तियां और रोला की दो पंक्तियां, कुल छः पंक्तियां । दोहा मुक्तक की चौथी पंक्ति का उत्तरार्ध ही अर्धरोला का पहला चरण होगा (पांचवीं पंक्ति की शुरुआत)। दोहा मुक्तक का पहला शब्द / शब्द समूह ही छंद की अंतिम पंक्ति का समान्त होगा (कुंडलिया की तरह)।

-- उदाहरण मूल छंद


जीवन है रुकता कहाँ, देखो जिस भी ओर।
कर्तव्यों का बोझ है, पथ है बहुत कठोर।
समय कहाँ है देखता, सुबह-दोपहर-शाम,
कर्म सदा ही जीतता, जिसका ओर न छोर।।
जिसका ओर न छोर, क्षितिज सा है यह भी मन।
घूमे दूर सुदूर, कहाँ रुकता यह जीवन ।।
+++++++

कुछ तो बन्धन चाहिए, सम्बंधों में मित्र।
खाली शीशी इत्र की, महक बसे बिन इत्र।
हवा कहीं दिखती नहीं, बसी मगर हर ओर,
हों ऐसे सम्बन्ध बस, जिनसे बने चरित्र।।
जिनसे बने चरित्र, बनेंगे कुछ तो दुश्मन।
ज्यों फूलों संग खार, चाहिए कुछ तो बंधन ।। -- डाँ. गोपाल कृष्ण भट्ट ‘आकुल’, मुक्तक लोक
..0..
अध्‍यक्ष को सम्‍बोधित करते हुए एवं निम्‍न शीर्षक सहित पटल पर प्रकाशित करें-
************************************************************************************
मुक्‍तक-लोक<>तरंगिनी छंद एवं समीक्षा समारोह-597<>सोमवार, 10.11.2025
************************************************************************************
समारोह अध्‍यक्ष- श्री राजकिेशोर मिश्र मोहम्‍मदी
संयोजक- छंदाकार श्री राकेश मिश्र 
संचालक गण- श्री अश्‍वनी कुमार एवं सुश्री गीतांजलि गुप्‍ता    
************************************************************
अन्य उदाहरण


माता ही भुवनेश है, माता जगदाधार 
वंदन जिसका नित करें, जग के पालनहार।।
बिन देखे पहचान ले, बिन बोले हो बात,
अद्भुत है संवेदना, अद्भुत माँ का प्यार
अद्भुत माँ का प्यार, और अद्भुत है नाता।
शत शत कोटि प्रणाम,  तुम्हें है मेरी माता।। -- श्री राजकिशोर मिश्र मोहम्मदी मुक्तक लोक
+++++++++
दिवस सुनहरे लग रहे , भीग रही है रात।
गर्मी से राहत मिली, निकल गई बरसात।
जलचर थलचर उभयचर, सुखी गगनचर वृंद,
लाई फिर हेमंत ऋतु , निर्मल सुखद प्रभात।।
निर्मल सुखद प्रभात , पवन-पग लगते ठहरे।
खिले कंज बहुरंग , देखकर दिवस सुनहरे।।--छंदकार श्री  राकेश मिश्र, मुक्तक लोक
--00--
इस समारोह में विद्वज्‍ज्‍नों द्वारा प्रकाशित छंद मुक्‍ताकंठ / मुक्‍ताहार पर रचनायें- 
1
पावन लगता छंद नव, लिख कर करूँ प्रयास।
कहती प्रति क्षण तूलिका,मात्रा आयी रास।
मन को भाए मापनी, पंक्ति-पंक्ति में शोर--
जयकारा गुरुदेव का,यात्रा यह है खास।।
यात्रा यह है खास,छंद लगता मनभावन।
शिल्पकार का शिल्प,लगे उर को अति पावन।। -सुश्री वर्तिका अग्रवाला 'वरदा'
2
दुर्गम है अति जिंदगी,लेकिन नहीं थकान।
कर्मनिष्ठ मानव सदा , रहते हैं गतिमान।
अवरोधो को तोड़ कर, सुगम बनाते राह -
बढ़ते हैं निज लक्ष्य पर, बना नयी पहचान।
बना नयी पहचान, उम्र हो ज्यादा या कम।
करते सतत प्रयास, राह हो कितनी दुर्गम। --सुधा मिश्रा
3
रचना का स्वागत करें, नवल छंद साभार।
आकुल जी की तूलिका, रचे सृजन संसार।
कुंडलिया के वंश की, रच दी नयी प्रजाति-
अनुपम अद्भुत छंद नव, हुआ आज साकार।
हुआ आज साकार, सृजन का सुंदर सपना।
नवल सर्जना भव्य, छंद यह मनहर रचना।। - श्यामराव धर्मपुरीकर गंजबासौदा, विदिशा म.प्र.
4
इस मनोहारी छंद के प्रणेता #डॉ_आकुल जी का हार्दिक अभिनंदन, बधाई और अनंत शुभकामनाएँ , इस छंद को पाकर #मुक्तक_लोक निहाल है! इस नवीन छंद का नाम यही रखें - 
मुक्तकंठा/ मुक्ताहार छंद
दर्शन दुर्लभ सूर्य के,अतिथि हो गई धूप,
लो,मौसम बागी हुआ,पल-पल बदले रूप,
किरणों पर प्रतिबन्ध है, रहना बदली ओट,
ढकी-मुँदी बैठी रहो , जाड़े के अनुरूप !
जाड़े के अनुरूप, भास्कर करता नर्तन,
घूँघट में हैं बन्द, धूप के स्वर्णिम दर्शन! -- प्रो.विश्वम्भर शुक्ल
--00--
अन्‍य रचनाकार जिन्‍होंने लाइक्‍स किये एवं रचनायें प्रकाशित करीं- 

1. सुश्री सीमा मिश्रा संजसी; 2. श्री श्‍यामराव धर्मपुरीकर; 3. श्री दीप नारायण झा दीपक; 4. सुश्री सुधा राठौड़ 5. सुश्री कांति शुक्‍ला 6. सुश्री गीतांजलि गुप्‍ता; 7. श्री राम नरेश मिश्रा; 8. श्री अश्विनी कुमार;  9. सुश्री मंजुला चतुर्वेदी; 10. अल्‍का गुप्‍ता भारती; 11. कामिनी श्रीवास्‍तव ‘कीर्ति’ 12. डॉ. उमा शंकर शुक्‍ल शितिकंठ; 13. डॉ. राजकुमारी वर्मा; 14. सुश्री स्‍नेहप्रभा खरे; 15. श्री ओमप्रकाश गावशिंदे ओम् 16. सुश्री अंजू कपूर गांधी; 17. सुश्री प्रमिला श्री तिवारी; 18. सुश्री साधना हरीश; 19. सुश्री रेखा जोशी; 20. श्री रमानिवास तिवारी; 21. सुश्री मीनाश्री बडगवे; 22. सुश्री रामबाई अहिरवार । 

11 नवंबर 2019

'आकुल' का गीतिका शतक 'चलो प्रेम का दूर क्षितिज तक पहुँचायें संदेश' बिसौली (बदायूँ) में पुरस्‍कृत

'हिंदी भूषण श्री सम्मान' से भी सम्मानित 'आकुल'
25 से अधिक राज्‍यों और पड़ौसी मित्र देश नेपाल से पधारे अतिथियों और साहित्‍यकारों सहित 200 से अधिक संख्‍या में 5वें के.बी. हिंदी साहित्‍य समिति, बिसौली (बदायूँ) का दो दिवसीय साहित्यकार समागम 2 नवम्‍बर, 2019 की सायं कवि सम्‍मेलन से आरंभ हो कर एवं जो काव्‍य पाठ न कर पाये उनकी 3 नवम्‍बर, 2019 को सम्‍मान समारोह और भोजनोपरांत काव्‍य संध्‍या तक चला. साहित्यिक कुंभ के रूप में उच्‍च स्‍तरीय संचालन, व्‍यवस्‍था और भावविभोर कर देने वाले आतिथ्‍य से ओतप्रोत ''आर.के.इंटरनेशन स्‍कूल'' बिसौली के प्रांगण में सम्‍पन्‍न हुआ समारोह एक छाप छोड़ गया.
पुस्‍तकों, पत्रिकाओं का विमोचन करते हुए मंचस्‍थ अतिथि
उत्‍तरप्रदेश के बरेली, बदायूँ, चँदौसी, रामपुर, मथुरा, पीलीभीत, अलीगढ़, लखनऊ से एवं अन्‍य राज्‍यों से दिल्‍ली, राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ साथ ही अहिंदी भाषी क्षेत्र तमिलनाडु, गोआ, महाराष्‍ट्र, हैदराबाद आदि से पधारे शीर्षस्‍थ साहित्‍यकारों ने मात्र सम्‍मान ही प्राप्‍त नहीं किया अपितु हिंदी पर उनकी रचनाधर्मिता के लिए वाह-वाही भी बटोरी.

ग़ज़ल को परिवर्धित नाम 'चारु' देने के लिए शोध कर रहे 15 से अधिक कृतियों के रचनाकार त्रिभुवन विश्‍वविद्यालय, विराटनगर (नेपाल) के प्रख्‍यात हिंदी-नेपाली साहित्‍यकार प्रोफेसर देवी पंथी जी सम्‍मान समारोह के मुख्‍य अतिथि थे. अध्‍यक्षता उ.प्र. हिंदी संस्‍थान, लखनऊ से साहित्‍य भूषण सम्‍मान प्राप्‍त बरेली के श्री सुरेश बाबू मिश्रा थे और विशिष्टि अतिथि हिंदी संस्‍थान की सम्‍पादक डॉ. अमिता दुबे थीं.
02 नवम्‍बर को वाराणसी के कवि डॉ. ब्रजेंद्र नारायण द्विवेदी ‘शैलेष’ ने की तथा संचालन युवा हास्‍य कवि गोपाल ‘ठहाका’ एवं घुमक्‍कड़ कवि ग़ाफ़ि‍ल स्‍वामी ने किया. शुभारंभ मंचासीन कवियों, के.बी. हिंदी साहित्‍य समिति के अध्‍यक्ष डॉ. सुधांशु व आर.के. इंटरनेशनल स्‍कूल के डायरेक्‍टर देवरत्‍न वार्ष्‍णेय द्वारा दीप प्रज्‍ज्‍वलन एवं शिवकुमार चंदन की वाणी वंदना से हुआ.
कवियों के कुछ युग्‍म जो कवि सम्‍मेलन को अविस्‍मरणीय बना गये-
डॉ. के उमराव विवेकनिधि (मथुरा)-
नूतन सदी के चाँद तू घूँघट से निकल.
तेरी शोहरत पे कवि शायर नई गायें ग़ज़ल.
रामकृष्‍ण वि. सहस्रबुद्धे (नासिक)-
जीवन साथी ढूँढ राहे हैं देखो अब अखबारों में.
बिकते दूल्‍हे दुल्‍हन भी हैं खुले आम बाज़ारों में.
ग़ाफिल स्‍वामी (अलगढ़)-
झूठ बोल ठग लूट कर, जोड़ न लाख करोड़.
ग़ाफ़ि‍ल इक दिन सब यहाँ, जाएगा तू छोड़.
डॉ. ब्रजेंद्र नारायण ‘शैलेष’ (वाराणसी)-
कौन यहाँ राजा है कौन यहाँ रंक.
सबके ही उग आए लाल लाल पंख.
प्रोफेसर दीवीपंथी (नेपाल)-
बिसौली शहर अच्‍छा लगा.
दिल लोगों का सच्‍चा लगा.
ईश्‍वर दयाल गोस्‍वामी (सागर)
आँसू पूरा धर्मग्रंथ है.
प्रेमपंथ ही सही पंथ है.
डॉ. सतीश चंद्र शर्मा ‘सुधांशु’ (बिसौली)
मोदी तूने नाम विश्‍व में खूब बटोरा.
थमा दिया इमरान हाथ में एक कटोरा.
इफ़्तिख़ार ‘’ताहिर’’ (रामपुर)
पहले खुद को सँभाल कर रखना.
फि‍र क़दम देखभाल कर रखना.
वीरेंद्र गुप्‍त (ग़ाजियाबाद)
फुरसत नहीं किसी को सुन ले जो दादी की रामकहानी.
है अभाव की स्‍वयं सहेली पर आशीषों की है रानी.
युवा कवि मोहित शर्मा (म.प्र.)
मेरा घर मोम का है मैं इसे कैसे सँभालूँगा.
दिया न मेरे हाथों में दिया जाये तो अच्‍छा है.
सुरेंद्र नाज़ ‘बदायूँनी’
हमें तुम जैसा चाहो रूप दे दो.
अभी हम चाक पे रक्खे हुए हैं.
दीपक गोस्‍वामी ‘चिराग’ (संभल)
अंक पत्र की स्‍पर्धा में बस्‍ते झूल रहे.
माली की चाहत की ख़ातिर मुरझा फूल रहे.
राजेश ‘तन्‍हा’
बट विशाल बूढ़े पीपल की भाती नहीं हैं छाँव.
मुझको अब ऐसा लगता है बदल गये हैं गाँव.  
विजय कुमार सक्‍सैना
पिता नाम संघ्‍ज्ञर्ष का, माँ ममता की खान.
पृथ्‍वी पर दो नाम हैं, सचमुच ब्रह्म समान.
शिवकुमार ‘चंदन’ (रामपुर)
भावलोक में मधुरमिलन का गूँज रहा संगीत.
किसे पुकारूँ किसे निहारूँ कौन है सच्‍चा मीत.      
गोपाल ‘ठहाका’ (हरदोई)
नफ़रत की सीमा यदि हद से पार न होती.
इसके आँगन में ऊँची दीवार न होती.
प्रवीण अग्रवाल ‘नादान’
चैन से जीने ही नहीं देता
बड़ा ही बेरहम जमाना है.
उपस्थित अतिथिगण एवं आमंत्रिक साहित्‍यकार
इसके अतिक्ति साहिल मिश्रा, मयंक मिश्रा, मोहित शर्मा, सुग्रीब वार्ष्‍णेय ‘अमन’, सत्‍यवीर सिंह ‘उजाला’, राहुल मिश्रा, मनोज कुमार, स्‍तुति शर्मा, ऱद्रांश वत्‍स भार्गव, कृष्‍णगोपाल अग्रवाल एवं नेपाल की कवयित्री राधिका शर्मा ने भी काव्‍य पाठ किया. के.बी.साहित्‍य समिति द्वारा सभी कवियों को प्रतीक चिह्न एवं अंगवस्‍त्र प्रदान कर सम्‍मानित किया गया. सहसचिव विजय कुमार सक्‍सेना ने सभी का आभार व्‍यक्‍त किया.
दिनांक 03 नवम्‍बर को प्रात: 11 बजे डॉ. शिवशंकर यजुर्वेद के सस्‍वर सरस्‍वती वंदना से आरंभ हुए समारोह में के.बी. साहित्‍य समिति के अध्‍यक्ष श्री सुधांशुजी ने स्‍वागत वंदन किया तथा उनके पुत्र ने संस्‍था का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्‍तुत किया.
पुस्‍तकों की विमोचन शृंखला में  के.बी. साहित्‍य समिति का उ.प्र. हिंदी संस्‍थान, लखनऊ से 2 लाख का पुरस्‍कार व साहित्‍यभूषण सम्‍मान प्राप्‍त डॉ. मिथिलेश दीक्षित पर आधारित विशेषांक 'नये क्षितिज’ एवं नियमित निकलने वाले ‘नये क्षितिज’ के अप्रेल-सितम्‍बर के साथ संयुक्‍त अंक का विमोचन, नेपाल की पत्रिका पूर्वांचल दर्पण, अलीगढ़ से निकलने वाली शेषामृत का गीत विशेषांक, चारू’ पर लिखी एक गुटका ''ग़ज़ल और चारु’’, डॉ. मंजू यादव का कहानी सेंग्रह 'सोना गाछी' आदि का विमोचन हुआ.
सम्‍मानों के अंतर्गत साहित्‍यभूषण रु. 5100/- का सर्वोच्‍च पुरस्‍कार ‘‘साहित्‍य सिंधु’’ डॉ. अमिता दुबे, लखनऊ को श्रीमती डॉ. मिथलेश दीक्षित द्वारा माँ की स्‍मृति में दिया गया जो विशिष्‍ट अतिथि भी थीं. 2100/- के दस पुरस्‍कार उपस्थित साहित्‍यकारों यथा डॉ. हरेंद्र हर्ष, डॉ. रमाकांत आपरे (महाराष्‍ट्र), राम कृष्‍ण सहस्त्रबुद्धे (महाराष्‍ट्र) एवं गीतांजलि सक्‍सैना को शाल स्‍मृति चिह्न देकर सम्‍मानित किया गया. एवं रु.1100/- के 10 पुरस्‍कार एवं सारस्‍वत सम्‍मान उपस्थित साहित्‍यकारों यथा डॉ. सुरंगमा यादव, डॉ. सुषमा चौधरी,दिल्‍ली, कीर्ति प्रदीप वर्मा, होशंगाबाद, मधु शंखधर ‘स्‍वतंत्र’, वीरेंद्र गुप्‍त मोहन लाल मिश्र ‘धीरज’, ईश्‍वरदयाल गोस्‍वामी, सागर, विजय कुमार मिश्र ‘बुद्धिहीन’, डॉ. श्री प्रकाश यादव, अनुराग मिश्र ‘गैर’, नंद लाल मणि त्रिपाठी, डॉ. प्रताप मोहन भारतीय (हि.प्र.) , डॉ. के. सुधा, आंध्रप्रदेश, डॉ. आकुल, कोटा एवं डॉ. मनोज कुमार सिंह को शाल प्रतीक चिह्न एवं राशि देकर सम्‍मानित किया गया. साथ ही अन्‍य उपस्थित साहित्‍यकारों को काका हाथरसी, शकील बदायूनी, महादेवी सम्‍मान, नीरज सम्‍मान, साहित्‍य भूषण, साहित्‍य शिरोमणि आदि सारस्‍वत सम्‍मान भी प्रदान किये गये, नवोदित रचनाकारों, योग शिक्षकों, पत्रकारों, मंचस्‍थ अतिथियों आदि को भी सम्‍मानित किया गया. रु. 2100/- 1100/- के सभी पुरस्‍कार प्रायोजित थे.
'डॉ. आकुल' को सम्‍मानित करते समिति के अध्‍यक्ष डॉ. सुधांशु एवं प्रायोजक
इस समारोह में मेरी गीतिका शतक ‘चलो प्रेम का दूर क्षितिज तक पहुँचायें संदेश’’ पर मुझे ‘’ स्‍व. रामस्‍वरूप शर्मा की स्‍मृति में ‘’हिंदी भूषण श्री सम्‍मान’’ से सम्‍मानित किया गया. रु. 1100/- की राशि के साथ प्रशस्ति पत्र , स्‍मृति चिह्न, शाल प्रदान किया गया. 'आकुल' ने बताया कि प्रख्‍यात कवि एवं गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास 'नीरज' ने ग़ज़ल का 'गीतिका' नाम दिया और वे इसे आगे बढ़ा रहे हैं. सम्‍पूर्ण रूप से हिंदी छंद साहित्‍य को समर्पित इस विधा में 50 से अधिक छंदों पर आधारित 100 गीतिकाओं को रचा गया हे. जिसे समिति द्वारा पुरस्‍कार के लिए चयन किया गया. उनहोंने अध्‍यक्ष श्री 'सुधांशु' जी का आभार व्‍यक्‍त किया.
हिमाचल प्रदेश, नेपाल, तमिलनाडु के हिंदी समूहों ने श्री 'सुधांशु' जी के इस तरह के आयोजन से हिंदी के विकास के लिए जो कार्य किया जा रहा है, उस पर उन्हें भी सम्मानित किया और उन्होंने व कई साहित्यकारों ने दी गई पुरस्कार राशि को ''के.बी. हिंदी साहित्य समिति' के विकास के लिए दानस्वरूप लौटा दी.
कवि सम्‍मेलन में प्रख्‍यात हास्‍य कवि 'ठहाका' ने एवं सम्‍मान समारोह में अपने ओजस्‍वी संचालन से बरेली के प्रख्‍यात साहित्‍यकार डॉ. नितिन सेठी ने सभी उपस्थित साहित्‍यकारों व अतिथियों को मंत्रमुग्‍ध कर दिया.
अल्‍पाहार के साथ दो दिन चले समारोह का समापन हुआ.
प्रस्‍तुति- आकुल