पर्व लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पर्व लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

26 जनवरी 2023

गणतंत्र दिवस भी हुआ आज, वासंती है

 गीतिका

गणतंत्र दिवस भी हुआ आज, वासंती है।
गौरवान्वित भी हुआ स्वराज, वासंती है।1।
घर-घर फहर रहा राष्ट्रीय, ध्वज अपना,
हर गली गाँव, हर घर समाज, वासंती है।2।
खेत लहलहा रहे चारसू, सरसों की,
चादर फैली नभ पर सिराज, वासंती है।3।
हुई फाग की आहट जाने को है शरद,
मौसम का भी अब मिजाज, वासंती है।4।
गाओ गीत सुमंगल पहना, कर ‘आकुल’
गणतंत्र दिवस को आज ताज, वासंती है।5।
-आकुल

4 अगस्त 2020

रक्षा बंधन मात्र एक व्‍यवहार नहीं

हो रक्षाबंधन मात्र एक, व्‍यवहार नहीं.
हो बहिन-भाईका ही अब यह, त्योहार नहीं.

है आज अलग इक सोच हमें, पैदा करनी,
पीटी होगी कल पर लकीर, हर बार नहीं.

इतिहास टटोलें भेजी रक्षा, की सौगातें,
अब बातें करें अनुग्रह की, अधिकार नहीं.

रक्षा सूत्र सभी पहनें मिल, कर हाथों में,
रक्षाबंधन मात्र एक व्‍यवहार नहीं
है आवश्यकता, इसका हो, परिहार नहीं.

बढ़े प्रदूषण सुविधायें हों, खत्‍म सभी अब,
हो हलचल प्रकृति विरुद्ध कहीं, स्‍वीकार नहीं.

वृक्षों को संरक्षित करने, सूत्र बाँधिए,
है नहीं असंभव पर दुश्कर, दुश्‍वार नहीं.

प्रहरी हों  घर में शांति दूत, बच्‍चों के अब,
हो नहीं कहीं भी बिन बुजुर्ग, परिवार नहीं.

हर स्वप्‍न स्वच्‍छ भारत का हो, पूरा आकुल',
श्रमदान करें अरु दान करें, व्यापार नहीं.

16 अगस्त 2019

आज न रूठे भाई-बहिना, और न कोई अपना

गीतिका
छंद- सार
पदांत- 0
समांत- अना

आज न रूठे भाई-बहिना, और न कोई अपना.
दृढ़ रहना है हमको मिलजुल, कर दर्दों को सहना.

मणिकांचन संयोग कहें या, चमत्‍कार है कह लें,
लद्दाख और कश्मीर सहित, पर्व आज है मनना.

राष्‍ट्रीय व सांस्‍कृतिक पर्व का, योग अनूठा है यह,
सर्वधर्म समभाव बनायें, यही चाहती विधना.  

आज नहीं यह स्‍वप्‍न इतिहास, बना आज भारत का.
मित्र बने दुश्‍मन भी अपना, धर्म गले है लगना.

हर दिन हैं त्‍योहार मनाते, अमर इसी से संस्कृति,
आज विश्‍व है चकित देख कर, भारत की संरचना.

रामचरित, गीता, पुराण वेदों ने महिमा गाई,
मातृभूमि, गुरु मात-पिता अरु राष्‍ट्र कभी मत तजना.

मानवता के लिए चलो सब, पर्व सहर्ष मनायें,
जियो और जीने दो सबको, आकुल का यह कहना.