11 जून 2026

आओ मेघा हरियाली मरु में लाओ

गीतिका
छन्द- रास
विधान- 22 मात्रीय सम मात्रिक छन्द- 8,8,6 पर यति।
अपदान्त
समान्त- आओ

आओ मेघा, हरियाली मरु, में लाओ।
हर घर, जन पथ, वृक्षावलियों, पर छाओ।1।

कहीं नौतपा, विक्षोभों की, मार कहीं,
उमस, आँधियों, लू से राहत, दे जाओ।2।

खेलेंगे हम, बच्चे कैसे, भू तपती,
धरती को भी, थोड़ी ठण्डक, पहुँचाओ।3।

खेत बाग जन जन के चेहरे, मुरझाए,
नयी ताजगी, भर दो अब ना, तड़पाओ।4।

आए तो हो, शुष्क बने तुम, भी देखो,
भीषण लू में, अपने पर मत, झुलसाओ ।5।

वृक्ष बनेंगे, तब ही पौधे, जल बरसे,
जाओ जलधर मेघवलियों सँग आओ ।6।

तन मन हरसे, बाग सघन वन बन जायें,
इतना बरसो कूप ताल सर छलकाओ।7।

9 जून 2026

सर्वधर्म समभाव बना कर रहना चाहिए

 गीतिका

छन्द- गगनांगना
विधान- 25 मात्रीय, 16, 9 पर यति, अन्त 212
पदान्त- चाहिए
समान्त- अहना
सर्वधर्म समभाव, बना कर, रहना चाहिए ।
स्वस्थ रहें हम, कष्ट पालना, सहना चाहिए ।
खान-पान पर अब आवश्यक, प्रथम लगाम हो ,
स्वच्छ हो, न अब हवा प्रदूषित, बहना चाहिए ।
निकलें तभी, जरूरी हो जब, बाहर काम से,
दुर्घटनाएँँ, कम हों सबसे, कहना चाहिए ।
स्वर्ग यहीं, यदि बचे रहोगे, सब यह ठान लें,
नहीं दुराग्रह, नहीं हठाग्रह, दहना चाहिए ।
चलें सुरक्षित, धीमे वाहन, चला रहें सजग,
कहीं न घर अब, कुछ आलस में, ढहना चाहिए ।।