गीतिका
छन्द- रास
विधान- 22 मात्रीय सम मात्रिक छन्द- 8,8,6 पर यति। अपदान्त
समान्त- आओ
आओ मेघा, हरियाली मरु, में लाओ।
हर घर, जन पथ, वृक्षावलियों, पर छाओ।1।
कहीं नौतपा, विक्षोभों की, मार कहीं,
उमस, आँधियों, लू से राहत, दे जाओ।2।
खेलेंगे हम, बच्चे कैसे, भू तपती,
धरती को भी, थोड़ी ठण्डक, पहुँचाओ।3।
खेत बाग जन जन के चेहरे, मुरझाए,
नयी ताजगी, भर दो अब ना, तड़पाओ।4।
आए तो हो, शुष्क बने तुम, भी देखो,
भीषण लू में, अपने पर मत, झुलसाओ ।5।
वृक्ष बनेंगे, तब ही पौधे, जल बरसे,
जाओ जलधर मेघवलियों सँग आओ ।6।
तन मन हरसे, बाग सघन वन बन जायें,
इतना बरसो कूप ताल सर छलकाओ।7।