22 मई 2026

जिस पर बीती मित्र, आफतें वह ही जाने

छंद- रोला

अपदांत

समांत- आने

 

जिस पर बीती मित्र, आफतें वह ही जाने। होनी टले न घात, कह गए सभी सयाने। बिल्ली काटे मार्ग, कहीं पर रोये कुत्ता, छींकें जाते वक्त, अपशगुन है पहचाने। बोले काक मुँडेर, अतिथि या खबर मिले शुभ, दिखे सगर्भा नार, अशुभ हैं घर से जाने। लप लप करती जीभ, साँप की भाँति किसी की, है ना करने योग्‍य, भरोसा, मित्र बनाने। 'आकुल' का है मात्र, यही कहना सब समझो, प्रकृति दत्त ये सीख, यूँ ही' दुनिया ना माने।

 

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