1 मई 2026

कभी जब मेघ बेमौसम बरस पानी बहाते हैं

गीतिका
छंद- विधाता
मापनी- 1222 12222 12222 1222
पदांत- हैं
समांत- आते

कभी जब मेघ बेमौसम बरस पानी बहाते हैं।
कहीं फसलें उजड़ती हैं कहीं मुसकान लाते हैं।1।

हवाएँ भी वजह बनतीं, न होती कम तपिश जब भी,
कभी इनकी बदौलत मेघ वापिस लौट जाते हैं।2।

न विक्षोभों न लू के ही थपेड़ों से मिली राहत,
कहीं तूफान बन जाते, कहीं दहशत बढ़ाते हैं।3।

हवा सूरज जमाने से अदावत पालते आए,
मगर ये मेघ ही हैं जो सदा आशा जगाते हैं।4।

चलो वृक्षों से करते हैं सभी अब दोस्ती ‘आकुल’,
यही हैं जो हवा, सूरज व मेघों को झुकाते हैं।।5।।


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