29 अप्रैल 2026

हैं अनगिनत रूप नृत्य के भारत देश में

गीत
हैं अनगिनत रूप नृत्य के भारत देश में।
नृत्य से ही है समृद्ध सांस्कृतिक विरासत देश में।।

कुचिपुड़ी, मणिपुरी, कथकली, मोहिनीअट्टम।
कथक, ओडिसी, सत्तरिया, कजरी कालीयट्टम।।
पौपिर, राउफ, यक्ष गान, छऊ, गरबा, डांडिया।
तमाशा, गिद्दा, भांगड़ा, बिहू, कालबेलिया।।

संगीत नृत्य, गीत से ही हैं लोग जाग्रत देश में।
नृत्य से ही है समृद्ध सांस्कृतिक विरासत देश में।
हैं अनगिनत रूप नृत्य के भारत देश में।।

मुखौटा, युद्ध नृत्य, राखल, राई नृत्य, चौंगली।
लास्य, भवई, रास, घोड़ी, चरी नृत्य, कीकली।।
तेरह ताली, चारकूला, नौटंकी, बागला।
वैंगा, दोहाई, घूमर, लावणी जै, सांगला।।

लोकगीत नृत्य बोलियों की है रिवायत देश में।
नृत्य से ही है समृद्ध सांस्कृतिेक विरासत देश में।
हैं अनगिनत रूप नृत्य के भारत देश में।।
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(मुक्तक- छंद सरसी)
चलो नृत्य से ही बतलायें, मौन हमारा ध्येय।
एक एक ग्यारह बन कर हम, क्यों ना बनें अजेय।
लड़-भिड़ कर हम कौन शिखर छू लेंगे सोचें आज,
सूर्य सदृश बन कर क्यों जलना, चाहो तुम अज्ञेय।।
अज्ञेय – समझ से परे



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