11 अप्रैल 2026

दुख रहता है सदा न भाई

छंद- रासा
विधान- 16 मात्रीय छंद। जिसमें तीन चौकल अंत 2 गुरु वाचिक अनिवार्य। यति अंत में। लय चौपाई की तरह।
अपदांत
समांत- आई 

दुख रहता है सदा न भाई।  
सुख से हुई सदा भरपाई।

सुख जब जब डूबा जीवन में,  
दुख ने आग सदा भड़काई।

दुख ने चाहा सदा भरोसा,
जब तक सुख की घड़ी न आई।

आते ही सुख दुख को भूले,
यह सुख की है बड़ी बुराई।

क्‍यों सीखे ना आकुल सुख से,
दुख ज्‍यादा सुख कम सच्‍चाई  ।। 

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