छंद-
पद (चौपाई परिवार)
विधान-
चौपई + सार छंद से पूर्ति एवं शेष द्विपदियाँ सम तुकांत।
जपो नित ‘श्रीकृष्ण
शरणं’ मम ।
ध्यान लगाओ, समय निकालो, कभी नहीं बिगड़े क्रम ।।
समय लगे भारी जब तब जप, अष्टाक्षर करता कम ।
कभी रहे विचलित मन जिसका, बैठे संत समागम ।।
दिनचर्या में रखो समय कुछ, साधो मौन नियम यम ।
सोचो समझो करो तभी कुछ, कभी न पालोगे भ्रम ।।
भजते रहना यह अष्टाक्षर, लगे न इसमें दम-खम ।
भाव रखो सेवा का ‘आकुल’ , नहिं विकल्प है दोयम ।।
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