13 मई 2026

माँ तो बस माँ जैसी होती

 माँ तो बस माँ जैसी होती ।

अमृत घोल पिलाया माँ ने ।
हाथों सदा झुलाया माँ ने ।
उँगली पकड़ चलाया माँ ने ।
रोने पर बहलाया माँ ने ।।

कभी नहीं वह धीरज खोती ।
माँ तो बस माँ जैसी होती ।।

किसने मोल किया है माँ का ।
इक अनमोल हिया है माँ का ।
नहीं तराजू बनी अभी तक,
जिसने तोल किया है माँ का ।  

फीके पड़ते हीरे मोती ।
माँ तो बस माँ जैसी होती ।।

नहीं मिला सुख माँ का जिसको ।
मिलती है सपनों में उसको ।
घर में इक तसवीर लगी हो,
देख न आँखें थकती जिसको ।।

माँ ही है केवल इकलौती । 
माँ तो बस माँ जैसी होती ।।   

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