माँ तो बस माँ
जैसी होती ।
अमृत घोल
पिलाया माँ ने ।
हाथों सदा
झुलाया माँ ने ।
उँगली पकड़
चलाया माँ ने ।
रोने पर
बहलाया माँ ने ।।
कभी नहीं वह धीरज
खोती ।
माँ तो बस माँ
जैसी होती ।।
किसने मोल
किया है माँ का ।
इक अनमोल हिया
है माँ का ।
नहीं तराजू
बनी अभी तक,
जिसने तोल
किया है माँ का ।
फीके पड़ते हीरे मोती ।
माँ तो बस माँ
जैसी होती ।।
नहीं मिला सुख
माँ का जिसको ।
मिलती है
सपनों में उसको ।
घर में इक
तसवीर लगी हो,
देख न आँखें
थकती जिसको ।।
माँ ही है
केवल इकलौती ।
माँ तो बस माँ जैसी होती ।।
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