छंद- पद
इस पद का विधान-
छंद चौपई + सरसी छंद से पूर्ति और शेष सम तुकांत में सरसी की द्विपदियाँ।
माँ की लीला अपरम्पार ।
कभी न थकती
करती रहती, घर के काम हजार ।1।
सुबह सवेरे से
लग जाती, मानी कभी न हार ।
सदा काम को
पूजा समझा, पहले घर परिवार ।2।
ढाई आखर प्रेम
लुटाया, कर सब कुछ निस्सार ।
अतिथि देवोभव:
समझ कर, सदा किया सत्कार ।3।
कुल कुटुम्ब का
मान बढ़ाया, पाया सबका प्यार ।
‘आकुल’ बना
उसी के दम घर, एक स्वर्ग का द्वार ।4।
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