14 मई 2026

माँ की लीला अपरम्‍पार

 छंद- पद
इस पद का विधान- छंद चौपई + सरसी छंद से पूर्ति और शेष सम तुकांत में सरसी की द्विपदियाँ।

गायन / संगीत- राग सारंग अथवा राग रामकली

माँ की लीला अपरम्‍पार ।
कभी न थकती करती रहती, घर के काम हजार ।1।
सुबह सवेरे से लग जाती, मानी कभी न हार ।
सदा काम को पूजा समझा, पहले घर परिवार ।2।
ढाई आखर प्रेम लुटाया, कर सब कुछ निस्‍सार ।  
अतिथि देवोभव: समझ कर, सदा किया सत्‍कार ।3।
कुल कुटुम्‍ब का मान बढ़ाया, पाया सबका प्‍यार ।
‘आकुल’ बना उसी के दम घर, एक स्‍वर्ग का द्वार ।4।

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