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गीतिका
सर्वोपरि ममता में माँ।
धीरज में क्षमता में माँ।1।
बन्द सदा रखती मुट्ठी,
उत्तमता, समता में माँ।2।
साख बनाई बरकत से,
जीती कायमता में माँ।3।
मन मारा हरदम उसने,
खुश है मद्धमता में माँ।4।
माँँ तो केवल माँँ होती,
सच की आगमता में माँ।5।
आगमता- प्रामाणिकता
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