8 नवंबर 2026

फिर आई दीवाली

अँगड़ाई ली मौसम ने फिर आई दीवाली।
अगुआई की घर-घर ने फिर आई दीवाली।
                    क्‍या घर, गली-गली, बाजारों में
जलते टिम टिम तारे वंदनवारों में
दीप जले मुंडेरों द्वारों पर
चंद्रिका छाई है गलियारों में 
पुरवाई चली सुगंधी, फिर आई दीवाली।
कर स्‍नान वसन नव बच्‍चों ने पहने
नमन किया फिर बालसूर्य को सबने
खिला मिठाई माँ ने दीं फुल‍झड़ि‍याँ
नज़र लगे ना करी आरती उसने
मस्ती छाई उन पर फिर आई दीवाली।
पर्वोत्सव ने फैलाया है उजास
सर्वधर्म समभाव से है उल्‍लास
होली दीवाली कटुताएँ भूलें,
मिलवर्तन  एक पुन: हो प्रयास
भलमनसाई परखी फिर आई दीवाली।   

अष्टादशभुज श्रीमद् महालक्ष्‍मी स्‍वरूप वर्णन

(छंद- माधवी मरहट्ठा )

 दक्षिण हस्‍त

 रूप विराट महालक्ष्मी का, सभी शक्तियों का आधार।
श्रीमद् देवी महाभागवत अरु शाक्त परंपरानुसार।1।
अष्टादशभुज स्वरूप अनुपम, धारे अस्त्र हेतु कल्याण।
धारे सभी प्राप्त अस्त्रों से, किया पापियों का संहार।2।
करने को संहार शक्ति का, सत-रज-तम का अस्त्र त्रिशूल,
और नियंत्रण करने वाला, अन्यायी पर अस्त्र कुठार।3।
दृढता व अटूट विश्वास का, अस्त्र वज्र था इंद्र प्रदत्त,
विष्णु प्रदत्त प्रबंध पराक्रम, हेतु चक्र अरु गदा प्रहार।4।
करने विजय बुराई पर माँ, लिए सदैव है अस्त्र खड्.ग,
संकल्प शक्ति अरु लक्ष्य भेदने, धनुष-बाण का किया विचार।5।
श्री, ऐश्वर्य, शुद्धता का है, कमल हाथ में बना प्रतीक,
सुख समृद्धि और अभय के लिए, माँ दे आशीर्वाद हजार।6।
पाने को मां का अशीष हो, मन निर्मल हो शुद्ध शरीर,
दक्षिण हस्‍ते अस्‍त्र धरे नौ, करने पूर्ण ध्येय अवतार।7।
 वाम हस्त
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वाम हस्त में धारे नौ विध, अस्त्र प्रतीक, भाव, संदाय।
सृजन और संयम का द्योतक, हाथ कमंडलु का अध्याय।1।
अमृत पात्र न कभी रिक्त हो, धारा माँ ने उसको वाम,
वार रोकने भक्तों की रक्षा को खेटक बने उपाय।2।
सत्य और अनुशासन न्यायिक, शक्ति, दंड अरु पाश प्रतीक,
घंट नकारात्मक ऊर्जा को, सकारात्मक को' शंख सहाय।3।
धनवर्षा, समृद्धि-ऐश्वर्य व धान्य हेतु है बना प्रतीक,
दक्षिण वाम हस्त अष्टादश माँ के अस्त्रों के संकाय।।4।

13 अक्टूबर 2026

जगह-जगह हों जागरण

 मुक्तकंठा छंद-

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1 (शब्द - जागरण)
जगह-जगह हों जागरण, सजतेे हैं पांडाला।
थापित हों माँँके कई, रूप स्वरूप विशाल।
चोला चढ़े सिँँगार हो, नया लगे नित भोग,
धूप-दीप-नेवेद्य से, दमके मात सुभाल।।
दमके मात सुभाल, आरती शाम सुबह हों।
करें डाँँडिया नृत्य, जागरण जगह-जगह हों।।
2 (शब्द - जगराता)
माता के दरबार में, भक्त झुकाएँँ माथ।
जगराते में बैठ कर महिमा गाऍं साथ ।
माँँ का कर गुएागान सब, पाते हैं आशीष,
सर्वधर्म समभाव को, इससे बड़ा न पाथ।।
इससे बड़ा न पाथ, पर्व हमको सिखलाता।
जो आए दरबार, उसे सुख देना माता।।

11 अक्टूबर 2026

देवी के अनगिनत रूप हैं

गीतिका

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छंद- माधवी मरहट्ठा
शिल्प विधान -- चौपाई +दोहा छंद का विषम चरण,
16,13 = 29 मात्रा
पदांत- जानिए ;
समांत- आनी
देवी के अनगिनत रूप हैं, मातृ भवानी जानिए।
कहीं अर्द्धनारीश्वर में है, शिवा शिवानी जानिए।
चामुण्डा, माँ अम्बे, काली, है विन्घ्याचलवासिनी,
महामाया है, कालरात्रि है, यही सयानी जानिए।
दस महाविद्यायें धारी तब, जग को दान दिया अभय,
राग-द्वेष, आसक्ति मिटायी, यही निशानी जानिए।
मधु-कैटभ, महिषासुर निशुम्भ , शुम्भ असुर मारे सभी,
शक्तिरूप धारा संहारा, थे अज्ञानी जानिए।
दम्भ दूर करने देवों का, अग्निदेव आह्वान कर,
तेजपुंज में आई दुर्गा, थे अभिमानी जानिए।
सिद्धिदात्री, जगत् कल्याणी , है नवदुर्गा मातु श्री,
जैसे वन की है रक्षक माँ, अरण्यरानी जानिए।
सप्त मातृकायें दस विद्या, नौ दुर्गा नवरात्रि में,
क्षमाशील बन पूज सकें वह, रीत निभानी जानिए।।

5 अक्टूबर 2026

घर की बगिया में

 बालगीत

घर की बगिया में
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घर की बगिया में खिली वह रातरानी है।
मुसकुराती हर अदा उसकी सुहानी है।।
घर की बगिया में.....
है परी सी कोमलांगी
छुई मुई लगती
कुंद सी कचनार जैसी
कुइ सरी लगती
छूते हरसिंगार सी खिरती सयानी है।
घर की बगिया में.....
धड़कता है दिल जरा सी
कुलबुलाहट से
चहकता है घर सभी का
चहचहाहट से
सुनते ज्यों नित आँगने चिड़ि‍यों की बानी है।
घर की बगिया में.....
प्यार से उसको पुकारें पीयु जैसे ही
कोकिला सी कुहुकती है
पी‍हु वैसे ही
वंश की मर्यादा, कुल की वह निशानी है।
घर की बगिया में.....
नन्हें मुन्नों से था खाली
कब से बरसों से
घर मेरा महका है जैसे
फूली सरसों से
ढाई आखर प्रेम की सरिता बहानी है।
घर की बगिया में.....
घर की बगिया में खिली वह रातरानी है।
मुसकुराती हर अदा उसकी सुहानी है।।
घर की बगिया में.....
-आकुल

25 सितंबर 2026

अनंत चतुदशी और गणेश विसर्जन

मुक्‍तकंठा छंद
1
बल, मति, धन, सामर्थ्‍य अरु, वैभव देय अनन्‍त।
पर्व अनन्‍त चतुर्दशी, पूजें अच्‍युत मंत।
ग्रंथि चतुर्दश सूत्र की,  देती यह संदेश,
दृढ निश्‍चय कर आज से, जियें वर्ष पयंन्‍त ।।
जियें वर्ष पर्यन्‍त, मौन से करें शुचित मन।
ताकि न माया मोह, करे बाधित बल, मति, धन।।
2
करें विसर्जन आज ही, गणपति को सब लोग।
पुन: बुलायेंगे प्रभू, बने योग संयोग।
कृपा रखें सब भक्‍त पर, क्षमा करें सब भूल,    
यथायोग्‍य सेवा हुई, यथाशक्ति रख भोग ।।
यथाशक्ति रख भोग, किया शृंगार सुदर्शन।
गणपति को साष्‍टांग, नमन कर करें विसर्जन ।।

2 सितंबर 2026

मेरा अभिनव हिन्‍दुस्‍तान

गीत
(छंद- चौपई)

है अभिनन्दन आयुष्मान।
मेरा अभिनव हिन्दुस्तान।।

हो बैसाखी न संविधान,
हो उत्कर्ष गणतंत्र विधान,
गौरवान्वित देश समग्र,
नवोन्मेषीय अभ्युत्थान।

है अ‍भिनन्दन हिन्दुस्तान ।।

कन्याकुमारि से कश्मीर,
रामलला का जन्मस्थान,
सम्प्रभुता से विकासशील,
वंदे भारत हो गुणगान।

मेरा अभिनव हिन्दुस्तान ।।

कण-कण इसका भारत रत्न,
हमको इस पर है अभिमान,
’आकुल’ का वंदन साष्टांग,
मेरा भारतवर्ष महान्।

है अभिनन्दन हिन्दुस्तान ।।  

(सद्य प्रकाशित गीत संग्रह 'मेरा अभिनव हिन्दुस्तान' से)