3 मई 2026

मैया चंदा बहुत सताये

छंद- पद
विधान- मुखड़ा चौपाई एवं पूर्ति सार छंद (16। 16,12) से एवं शेष द्विपदियाँँ सार छंद (16, 12) में    

मैया चंदा बहुत सताये।
नित्‍य बदलता अपनी सूरत, जैसे मुझे चिढ़ाए।।
जाऊँ जहाँ वहाँ वह आता, पास कभी ना आए।
आज अभी तक मिला नहीं वह, क्‍यों कोई समझाए।।
चूम कपोल यशोदा गोदी, ले उर कंठ लगाए।   
बोली कान्‍हा, दूध पिला कर मैया उसे सुलाए।।
दूध पियो सो जाओ शायद, सपनों में मिल जाये।
प्रात देख बलिहारी माँ मुख-मंडल चंद्र सुहाये।।  

1 मई 2026

कभी जब मेघ बेमौसम बरस पानी बहाते हैं

गीतिका
छंद- विधाता
मापनी- 1222 12222 12222 1222
पदांत- हैं
समांत- आते

कभी जब मेघ बेमौसम बरस पानी बहाते हैं।
कहीं फसलें उजड़ती हैं कहीं मुसकान लाते हैं।1।

हवाएँ भी वजह बनतीं, न होती कम तपिश जब भी,
कभी इनकी बदौलत मेघ वापिस लौट जाते हैं।2।

न विक्षोभों न लू के ही थपेड़ों से मिली राहत,
कहीं तूफान बन जाते, कहीं दहशत बढ़ाते हैं।3।

हवा सूरज जमाने से अदावत पालते आए,
मगर ये मेघ ही हैं जो सदा आशा जगाते हैं।4।

चलो वृक्षों से करते हैं सभी अब दोस्ती ‘आकुल’,
यही हैं जो हवा, सूरज व मेघों को झुकाते हैं।।5।।