गीतिका
मापनी- 2122 2122 2122 212
पदांत- माँँ शारदे
समांत- अरण
पट नयन खोलूँ सदा कर के स्मरण माँ शारदे।
फिर करूँ खटकर्म सारे संस्करण माँ शारदे।1।
पुष्प अर्पण नित्य करता शांति का आह्वान भी,
हो प्रकृति के प्रति सजग अंत:करण माँ शारदे।2।
जान कर अनजान बन कर हो न जाए कर्म जो,
चिह्न दे जाए अमिट वातावरण माँ शारदे।3।
पार भव सागर करूँ बस नाम लेकर आपका,
दो करूँ सत्कर्म ऐसा आचरण माँ शारदे।4।
लेखनी को धार दो, मैं लिख सकूँ रचना वही,
सब करें पढ़ कर जगत् में अनुसरण माँ शारदे।5।
आजकल सब हैं दुखी उलझे हैं मकड़जाल में,
मार्ग मध्यम ही करें सारे ग्रहण माँ शारदे।6।
आज ‘आकुल’ भी घिरा है बीच ऊहापोह में,
बच रहा हूँ आज तक ले कर शरण माँ शारदे।7।
-आकुल
मध्यम मार्ग- भगवान बुद्ध द्वारा दिया गया जीवन का एक संतुलित दृष्टिकोण है। यह किसी भी समस्या या जीवन शैली में "अति" (Extreme) से बचने की शिक्षा देता है।
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