11 अक्टूबर 2026

देवी के अनगिनत रूप हैं

गीतिका

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छंद- माधवी मरहट्ठा
शिल्प विधान -- चौपाई +दोहा छंद का विषम चरण,
16,13 = 29 मात्रा
पदांत- जानिए ;
समांत- आनी
देवी के अनगिनत रूप हैं, मातृ भवानी जानिए।
कहीं अर्द्धनारीश्वर में है, शिवा शिवानी जानिए।
चामुण्डा, माँ अम्बे, काली, है विन्घ्याचलवासिनी,
महामाया है, कालरात्रि है, यही सयानी जानिए।
दस महाविद्यायें धारी तब, जग को दान दिया अभय,
राग-द्वेष, आसक्ति मिटायी, यही निशानी जानिए।
मधु-कैटभ, महिषासुर निशुम्भ , शुम्भ असुर मारे सभी,
शक्तिरूप धारा संहारा, थे अज्ञानी जानिए।
दम्भ दूर करने देवों का, अग्निदेव आह्वान कर,
तेजपुंज में आई दुर्गा, थे अभिमानी जानिए।
सिद्धिदात्री, जगत् कल्याणी , है नवदुर्गा मातु श्री,
जैसे वन की है रक्षक माँ, अरण्यरानी जानिए।
सप्त मातृकायें दस विद्या, नौ दुर्गा नवरात्रि में,
क्षमाशील बन पूज सकें वह, रीत निभानी जानिए।।

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