13 अक्टूबर 2026

जगह-जगह हों जागरण

 मुक्तकंठा छंद-

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1 (शब्द - जागरण)
जगह-जगह हों जागरण, सजतेे हैं पांडाला।
थापित हों माँँके कई, रूप स्वरूप विशाल।
चोला चढ़े सिँँगार हो, नया लगे नित भोग,
धूप-दीप-नेवेद्य से, दमके मात सुभाल।।
दमके मात सुभाल, आरती शाम सुबह हों।
करें डाँँडिया नृत्य, जागरण जगह-जगह हों।।
2 (शब्द - जगराता)
माता के दरबार में, भक्त झुकाएँँ माथ।
जगराते में बैठ कर महिमा गाऍं साथ ।
माँँ का कर गुएागान सब, पाते हैं आशीष,
सर्वधर्म समभाव को, इससे बड़ा न पाथ।।
इससे बड़ा न पाथ, पर्व हमको सिखलाता।
जो आए दरबार, उसे सुख देना माता।।

11 अक्टूबर 2026

देवी के अनगिनत रूप हैं

गीतिका

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छंद- माधवी मरहट्ठा
शिल्प विधान -- चौपाई +दोहा छंद का विषम चरण,
16,13 = 29 मात्रा
पदांत- जानिए ;
समांत- आनी
देवी के अनगिनत रूप हैं, मातृ भवानी जानिए।
कहीं अर्द्धनारीश्वर में है, शिवा शिवानी जानिए।
चामुण्डा, माँ अम्बे, काली, है विन्घ्याचलवासिनी,
महामाया है, कालरात्रि है, यही सयानी जानिए।
दस महाविद्यायें धारी तब, जग को दान दिया अभय,
राग-द्वेष, आसक्ति मिटायी, यही निशानी जानिए।
मधु-कैटभ, महिषासुर निशुम्भ , शुम्भ असुर मारे सभी,
शक्तिरूप धारा संहारा, थे अज्ञानी जानिए।
दम्भ दूर करने देवों का, अग्निदेव आह्वान कर,
तेजपुंज में आई दुर्गा, थे अभिमानी जानिए।
सिद्धिदात्री, जगत् कल्याणी , है नवदुर्गा मातु श्री,
जैसे वन की है रक्षक माँ, अरण्यरानी जानिए।
सप्त मातृकायें दस विद्या, नौ दुर्गा नवरात्रि में,
क्षमाशील बन पूज सकें वह, रीत निभानी जानिए।।

5 अक्टूबर 2026

घर की बगिया में

 बालगीत

घर की बगिया में
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घर की बगिया में खिली वह रातरानी है।
मुसकुराती हर अदा उसकी सुहानी है।।
घर की बगिया में.....
है परी सी कोमलांगी
छुई मुई लगती
कुंद सी कचनार जैसी
कुइ सरी लगती
छूते हरसिंगार सी खिरती सयानी है।
घर की बगिया में.....
धड़कता है दिल जरा सी
कुलबुलाहट से
चहकता है घर सभी का
चहचहाहट से
सुनते ज्यों नित आँगने चिड़ि‍यों की बानी है।
घर की बगिया में.....
प्यार से उसको पुकारें पीयु जैसे ही
कोकिला सी कुहुकती है
पी‍हु वैसे ही
वंश की मर्यादा, कुल की वह निशानी है।
घर की बगिया में.....
नन्हें मुन्नों से था खाली
कब से बरसों से
घर मेरा महका है जैसे
फूली सरसों से
ढाई आखर प्रेम की सरिता बहानी है।
घर की बगिया में.....
घर की बगिया में खिली वह रातरानी है।
मुसकुराती हर अदा उसकी सुहानी है।।
घर की बगिया में.....
-आकुल

25 सितंबर 2026

अनंत चतुदशी और गणेश विसर्जन

मुक्‍तकंठा छंद
1
बल, मति, धन, सामर्थ्‍य अरु, वैभव देय अनन्‍त।
पर्व अनन्‍त चतुर्दशी, पूजें अच्‍युत मंत।
ग्रंथि चतुर्दश सूत्र की,  देती यह संदेश,
दृढ निश्‍चय कर आज से, जियें वर्ष पयंन्‍त ।।
जियें वर्ष पर्यन्‍त, मौन से करें शुचित मन।
ताकि न माया मोह, करे बाधित बल, मति, धन।।
2
करें विसर्जन आज ही, गणपति को सब लोग।
पुन: बुलायेंगे प्रभू, बने योग संयोग।
कृपा रखें सब भक्‍त पर, क्षमा करें सब भूल,    
यथायोग्‍य सेवा हुई, यथाशक्ति रख भोग ।।
यथाशक्ति रख भोग, किया शृंगार सुदर्शन।
गणपति को साष्‍टांग, नमन कर करें विसर्जन ।।

2 सितंबर 2026

मेरा अभिनव हिन्‍दुस्‍तान

गीत
(छंद- चौपई)

है अभिनन्दन आयुष्मान।
मेरा अभिनव हिन्दुस्तान।।

हो बैसाखी न संविधान,
हो उत्कर्ष गणतंत्र विधान,
गौरवान्वित देश समग्र,
नवोन्मेषीय अभ्युत्थान।

है अ‍भिनन्दन हिन्दुस्तान ।।

कन्याकुमारि से कश्मीर,
रामलला का जन्मस्थान,
सम्प्रभुता से विकासशील,
वंदे भारत हो गुणगान।

मेरा अभिनव हिन्दुस्तान ।।

कण-कण इसका भारत रत्न,
हमको इस पर है अभिमान,
’आकुल’ का वंदन साष्टांग,
मेरा भारतवर्ष महान्।

है अभिनन्दन हिन्दुस्तान ।।  

(सद्य प्रकाशित गीत संग्रह 'मेरा अभिनव हिन्दुस्तान' से)

29 अगस्त 2026

काल स्‍वयं परिवीक्षा है

गीतिका 
छंद- आँसू
विधान- 14 मात्रा, यति अंत में। अंत गुरु से।
पदांत- है
समांत- ईक्षा

हर दिन एक परीक्षा है।
इसमें मिले न दीक्षा है।

बचपन और जवानी का,
काल स्‍वयं परिवीक्षा है।

मानव के हाथों में ही,
संयम और तितीक्षा है।

दुख की नही मात्र सुख की,
रहती सदा प्रतीक्षा है।

कर्म और संस्‍कारों से,
होती सदा समीक्षा है।

दीक्षा- गुरु मंत्र; परिवीक्षा- प्रशिक्षण; तितीक्षा- सहनशीलता   

28 अगस्त 2026

राखी गहना है अनमोल कलाई पर

 गीत

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राखी गहना है अनमोल कलाई पर
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राखी गहना है अनमोल कलाई पर।
बलिहारी जाती है बहिना भाई पर।
राखी गहना है..........

इक दिन मे जी लेती है वह कितने सुख,
भाई है तो कैसा डर, कैसे सुख दुख,
कृष्णा ने पाया था कृष्ण कन्‍हाई सा,
संकट में रहता है वह परछाईं सा,

जब है वीर संग क्या जगत् हँसाई पर,
बलिहारी जाती है बहिना भाई पर।
राखी गहना है..........

भाई् का सिर पर हो हाथ यह काफी है,
इसी लिए हाथों पर बाँधी राखी है,
बाबुल का घर छोड़ा लगा पराई अब,
भाई ने घर की हर रीत निभाई तब,

लगे न कभी पराई रत्ती राई भर,
बलिहारी जाती है, बहिना भाई पर।।
राखी गहना है..........