16 मार्च 2026

माँँ का मैं क्‍या करूँ बखान

 छंद- पद

चयनित विधान- चौपई + पूरक पंक्ति सरसी ; लगत द्विपद सरसी।
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माँ का मैं क्या करूँ बखान ।
घर का कोना-कोना करता, उसका ही गुणगान ।1।
प्रीत बहाती मलयानिल सी, है वह कृपानिधान ।
वाणी उसकी, है गुणकारी, मिश्री-नीम समान ।2।
समझौता करती रहती है, घर का पहले ध्यान ।
आशंकाओं का करती है, वह निर्मूल निदान ।3।
मुट्ठी बंद रखे विपदा में, फैलाती मुसकान ।
तोल-मोल कर लेती, परखे, रखती सब का ज्ञान।4।
कम बोले रह मौन देखती, सबका रहता भान।
वह सहिष्णु है कर्मनिष्ठ है, फल से रहे अजान।5।
माँँ केे चरणों में दुनिया है, रहे सर्वोच्च स्थान।
गीता सी पवित्र है ‘आकुल’ मानो तो भगवान।6।

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