बालगीत
घर की बगिया में
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घर की बगिया में खिली वह रातरानी है।
मुसकुराती हर अदा उसकी सुहानी है।।
घर की बगिया में.....
है परी सी कोमलांगी
कुंद सी कचनार जैसी
कुइ सरी लगती
छूते हरसिंगार सी खिरती सयानी है।
घर की बगिया में.....
धड़कता है दिल जरा सी
कुलबुलाहट से
चहकता है घर सभी का
चहचहाहट से
सुनते ज्यों नित आँगने चिड़ियों की बानी है।
घर की बगिया में.....
प्यार से उसको पुकारें पीयु जैसे ही
कोकिला सी कुहुकती है
पीहु वैसे ही
वंश की मर्यादा, कुल की वह निशानी है।
घर की बगिया में.....
नन्हें मुन्नों से था खाली
कब से बरसों से
घर मेरा महका है जैसे
फूली सरसों से
ढाई आखर प्रेम की सरिता बहानी है।
घर की बगिया में.....
घर की बगिया में खिली वह रातरानी है।
मुसकुराती हर अदा उसकी सुहानी है।।
घर की बगिया में.....
-आकुल

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