26 सितंबर 2015

गणेशाष्‍टक से गणेश आराधना

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जय गणेश।
सिद्धि विनायक, शिव गौरी सुत, जय गणेश।।

धरा सदृश्‍ा माँ है, माता की परिकम्‍मा कर आए।
एकदन्‍त गणनायक गणपति प्रथम पूज्‍य कहलाए।।
प्रथम पूज्‍य कहलाए गणपति जय गणेश।
गाएँ सब लम्‍बोदर गणपति, जय गणेश।।1।।

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जय गणेश ।।

लाभ क्षेम दो पुत्र, ॠद्धि सिद्धि के स्‍वामि गजानन।
अभय और वर मुद्रा में करते कल्‍याण गजानन।।
करते कल्‍याण गजानन, गणपति जय गणेश।
भावभक्ति से पूजें गणपति, जय गणेश।।2।।

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जयगणेश।।

मानव देव असुर सब पूजें, त्रिदेवों ने गुणगाए।
धर त्रिपुण्‍ड मस्‍तक पर शशिधर भालचन्‍द्र कहलाए।।
भालचन्‍द्र कहलाए गणपति, जय गणेश।
सिन्‍दूर धराओ सब मिल गण्‍पति जय गणेश।।3।।

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जय गणेश।।

असुर नाग नर देव स्‍थापक चतुर्वेद के ज्ञाता।
जन्‍म चतुर्थी, धर्म-अर्थ और काम-मोक्ष के दाता।
काम-मोक्ष के दाता, गणपति, जय गणेश।
विघ्‍न विनाशक, तारक गणपति, जय गणेश।।4।।

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जय गणेश।।

पंचदेव और पंचमहाभूतों में प्रमुख कहाये।
बिना रुके लिख महाभारत महाआशुलिपिक कहलाए।
आशुलिपिक कहलाए गणपति, जय गणेश।
शास्‍त्री, बु‍द्धि प्रदाता, गणपति, जय गणेश।।5।।

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जय गणेश।।

अंकुश, पाश, गदा, खड़्ग लड्डू चक्र षड्भु धारे।
मोदक प्रिय मूषक वाहन प्रिय शैलसुता के प्‍यारे।
शैलसुता के प्‍यारे गणपति, जय गणेश।
भ्रात कार्तिकेय हैं जय गणपति, जय गणेश।।6।।

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जय गणेश।।

सप्‍ताक्षर 'गणपतये नम:' सप्‍तचक्र मूलाधारी।
विद्या वारिधि वाचस्‍पति, महामहोपाध्‍याय अनुसारी।
सप्‍ताक्षर 'गणपतये नम:' जय गणेश।
गणनाथ नमो नमस्‍ते, गणपति जय गणेश।।7।।

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जय गणेश।।

छन्‍दशास्‍त्र के अष्‍टगणाधिष्‍ठाता अष्‍टविनायक।
आकुल जय गणेश जय गणपति सबके कष्‍टनिवारक।
सबके कष्‍टनिवारक गणपति, जय गणेश।
शोक विनाशकारकम् गणपति, जय गणेश।।8।।

जय गणेश, जय गणेश, गणपति, जय गणेश।।


22 सितंबर 2015

हिन्‍दी सबको प्‍यारी होगी

हिन्‍दी सबको प्‍यारी होगीं ।
इसकी छवि उजियारी होगी।।

ना कोई लाचारी होगी ।
अब ना ये बेचारी होगी।
ना कोई रँगदारी होगी।
मर्दुम रायशुमरी होगी।

खड़ी फौज सरकारी होगी।
भाषा अब दरबारी होगीं ।
अंग्रेजी पर भारी होगी।
फि‍र भी यह हितकारी होगी।

जब तक ना खुददारी होगी।
जब तक ना तैयारी होगी।
हिन्‍दी से ना यारी होगी।
आर पार की पारी होगी।

संसद में किलकारी होगी।
प्रतिनिधियों की बारी होगी।
तब ही जीत हमारी होगी।
जीत हमारी न्‍यारी होगी।

कुलकिरीट मणिधारी होगी।
हिन्‍दी की बलिहारी होगी।
राजपत्र में जारी होगी।
तब होरी दीवारी होगी।

हिन्‍दी सबको प्‍यारी होगीं ।
इसकी छवि उजियारी होगी।।

21 सितंबर 2015

नवगीत गुलदस्‍ता है


कविता कली, गीत गुल
नवगीत गुलदस्‍ता है।

कवियों ने इसे कई
नए आयाम दिये हैं
मुक्‍तछन्‍द की रौ में 
बहते पयाम दिये हैं

साहित्‍य संगीत से
इसमें रस मधुरता है। 


छन्‍दानुशासन प्रकृति
लोकगीत लुभावन है
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
प्रयोग भी रिझावन है

 लोक संस्‍कार इसमें
झलकती समरसता है।


मूलभाव रचना का
हो सदैव प्रतीकात्‍मक
सम्‍भव हो सके बने
वह सदैव सकारात्‍मक

गूँजता है नवगीत
जहाँ जीवन बसता है।

कविताओं गीतों ने
इसमें रवानी भर दी
फ़ज़ा ने प्राण फूँके
इसमें जवानी भर दी

हवा गुनगुनाती है
तब नवगीत बनता है।

14 सितंबर 2015

हिन्‍दी पूरब की थाती है

हिन्‍दी पूरब की थाती है।
चहूँ दिशा जानी जाती है।।

इसका विस्‍तृत है शब्‍दकोष
स्‍वर व्‍यंजन से है ज्ञानकोष
लिखते वैसा जैसा बोलें,
जिससे मिटते  हैं वाक्दोष।

है वैज्ञानिक आधारित यह।
संस्‍कृति इसके गुण गाती है।
हिन्‍दी पूरब की थाती है।।

सरल सुपाठ्य इसकी अभिव्‍यक्ति
है अदम्‍य साहस और शक्ति
इसका चुम्‍बकीय आकर्षण,
भावविभोर हो जाता व्‍यक्ति।

प्रादुर्भाव देव भाषा से,
देवनागरी कहलाती है।
हिन्‍दी पूरब की थाती है।।

कर्ता, कर्म, विशेषण, कारक,
संज्ञा, सर्वनाम संवाहक
क्रिया, वचन, स्‍वर, व्‍यंजन सारे,
सरल व्‍याकरण है परिचायक

वर्णमाल इसकी सुनियोजित,
लिखते पढ़ते आ जाती है।
हिन्‍दी पूरब की थाती है।।

आज चुनौती बनी हुई है
अंग्रेजी से ठनी हुई है
जालघरों से जुड़ी हई यह,
विश्‍वजनों संग खड़ी हुई है।

यह कवि मनीषियों की भाषा,
अतुलित ऊर्जा भर जाती है।
हिन्‍दी पूरब की थाती है।।

थाती- धरोहर

9 सितंबर 2015

हिन्‍दी बने विश्‍व की भाषा

हिन्‍दी बने विश्‍व की भाषा 
स्‍वाभिमान की है परिभाषा।
गंगा जमनी जहाँ सभ्‍यता,
पल कर बड़ी हुई है भाषा।
संस्‍कृति जहाँ वसुधैवकुटुम्‍बकम्,
हिन्‍दी संस्‍कृत कुल की भाषा।
बाहर के देशों में रहते,
हर हिन्‍दुस्‍तानी की भाषा।
हर प्रदेश हर भाषा भाषी,
हिन्‍दी हो उन सबकी भाषा।
आज राजभाषा है अपनी,
कल हो राष्‍ट्रकुलों की भाषा।
बने राष्‍ट्रभाषा यह 'आकुल',
बस यह है मन की अभिलाषा।

1 सितंबर 2015

हिन्‍दी ज़िन्‍दाबाद

ई पत्रिका अनुभूति (www.anubhuti-hindi.org) के 1 सितम्‍बर, 2015 के हिन्‍दी दिवस विशेषांक में पढ़ें मेरी रचना-  हिन्‍दी ज़िन्‍दाबाद