3 मई 2026

मैया चंदा बहुत सताये

छंद- पद
विधान- मुखड़ा चौपाई एवं पूर्ति सार छंद (16। 16,12) से एवं शेष द्विपदियाँँ सार छंद (16, 12) में    

मैया चंदा बहुत सताये।
नित्‍य बदलता अपनी सूरत, जैसे मुझे चिढ़ाए।।
जाऊँ जहाँ वहाँ वह आता, पास कभी ना आए।
आज अभी तक मिला नहीं वह, क्‍यों कोई समझाए।।
चूम कपोल यशोदा गोदी, ले उर कंठ लगाए।   
बोली कान्‍हा, दूध पिला कर मैया उसे सुलाए।।
दूध पियो सो जाओ शायद, सपनों में मिल जाये।
प्रात देख बलिहारी माँ मुख-मंडल चंद्र सुहाये।।  

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