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20 दिसंबर 2025
दाँँतो को रखिए सदा, स्वच्छ दुर्गंधविहीन (कुंडलिया छंद )
13 दिसंबर 2025
शरच्चंद्र
मुक्तक
ऐसा लगा नजदीक आया, और ज्यादा चाँद।
शरच्च्ंद्र बन कर हरसाया और ज्यादा चाँद।
सागर चॉंद के मिलन की फिर, बनी निशा गवाह,
सागर को देख मुसकुराया, और ज्यादा चाँद।।
12 दिसंबर 2025
माघ मास में
2 दिसंबर 2025
तीन कुंडलिया छंद
19 नवंबर 2025
कुंडलिया छंद दिवस पर कुछ कुंडलिया
18 नवंबर 2025
जीवन एकांकी भी तो है
x
17 नवंबर 2025
संकट मोचक है हनुमान
16 नवंबर 2025
जीना न सहल है
विधान- अर्द्ध सम मात्रिक 24 मात्रीय छंद जिसमें 11,13 पर यति। अंत 2 गुरु वाचिक। लगभग दोहे का विपरीत, विषम चरण दोहे का समचरण इसलिए विषम चरणांत 21 स्वत: बनता है, रोले का सम चरण त्रिकल से और चरणांत दो गुरु वाचिक। त्रिकल के बाद त्रिकल अनिवार्य ।
पदांत- है
समांत- अल
सीख सके तो सीख, कहा है समय अटल है।
अकर्मण्य भयभीत, रहा जीना न सहल है।
नहीं कहीं भी तोड़, सका कोई पैमाना,
सदा करे जो कर्म, सुखी है और सफल है।
जो समझे सत्कर्म, सदा सर्वोपरि जाने,
करते हैं जो कर्म, उसी का भाग्य प्रबल है।
बिना प्रदूषण हटे, कल्पनातीत भोग-सुख,
इसका नहीं विकल्प, राह भी नहीं सरल है।
रह निसर्ग से विमुख, झेलना विपदाएँ नित,
सँभल सके तो ठीक, न सँभले तो हलचल है।
सहल- आसान
