दोस्त फ़रिश्ते होते हैं. बाक़ी सब रिश्ते होते हैं.
मुक्तक
ऐसा लगा नजदीक आया, और ज्यादा चाँद।
शरच्च्ंद्र बन कर हरसाया और ज्यादा चाँद।
सागर चॉंद के मिलन की फिर, बनी निशा गवाह,
सागर को देख मुसकुराया, और ज्यादा चाँद।।
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