24 अप्रैल 2026

हर मौसम के अपने गुण है

 गीतिका
प्रदत्त छंद- लावणी/ ताटंक
विधान- 30 मात्राा, 16, 14 अंत तीन गुरु।
प्रदत्त पदांत- है
प्रदत्त समांत- आता

हर मौसम के अपने गुण है सबको तभी लुभाता है।
मिल जाये मनभाया उसका जैसे दिल खिल जाता है।

गरमी सरदी वर्षा पतझड़ मधुऋतु भी दी मानव को,
इसमें आते ढेरों पर्वोत्सव सब सहज मनाता है।

सुख-दुख, धूप-छाँव के जैसे आते हैं चल देते हैं,
प्रकृति सदा संकट को टाले मनव से जो नाता है।

इसी तरह चलता है जीवन धरती पर हर प्राणी का,
सक्षम बनना है हरसूरत मौसम हमें सिखाता है।

जीव दया सर्वोपरि सेवा बन निर्बल का संबल तू,
दिये प्रकृति ने खोल हाथ बन सक्षम तू तो दाता है।।

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