20 अप्रैल 2026

जिद्दी नहीं पिघलते उनका नसीबा

 गीतिका
छंद- वसंत तिलका  (वार्णिक)
मापनी 221 211 121 121 22
पदांत- उनका नसीबा
समांत- अलते

जिद्दी नहीं पिघलते उनका नसीबा।
आँखें सदा बदलते उनका नसीबा।

होते कई गुनहगार न मार से भी,
बोलें न ही बहलते उनका नसीबा।

खर्चे करें अधिक है कम आय तो भी,
ले ले उधार पलते उनका नसीबा।

बैठे रहें पर नहीं रुकती जुबाँ है ,
बोले बिना न चलते उनका नसीबा।

ना हो सही समय ‘आकुल’ छूट जाते,
मौके कभी फिसलते उनका नसीबा।     

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