गीतिका
छंद- विध्वंकमालिका
(मापनी युक्त मात्रिक छंद)
मापनी- 221
221 221 2
पदांत- ज़िन्दगी
समांत- अह
जी तू किसी
भी तरह ज़िन्दगी ।
हो ना ख़तम
बेवजह ज़िन्दगी ।
रख आस चल
तू अकेले यहाँ ,
होगी कभी
तो फ़तह ज़िन्दगी ।
हो या न हो
कारवाँ, दोस्त हों,
हो ख़ुशनुमा
हर सुबह ज़िन्दगी ।
रिश्ते
निभें ठीक, ना भी निभें,
जी ले तनिक
कर सुलह ज़िन्दगी ।
ना कर्ज़,
ना मर्ज़, ना ‘शत्रुता’,
’आकुल’ नरक
है कुनह ज़िन्दगी ।
कुनह- द्वेष, शत्रुता
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