1
बातें जो करते बहुत, करते कम जो काम।
संकट में पड़ते वही, होते हैं नाकाम।
होते हैं नाकाम, सदा मिलती न फिरौती।
नफा और नुकसान, प्रकृति सौदे की होती।
खिलता उनका भाग्य, मिलें ढेरों सौगातें।
जो करते हैं कर्म, व्यर्थ ना करते बातें।।
2
जग की अंधी दौड़ में, छूटें घर परिवार।
संबंधों व्यवहार में, पड़ने लगें दरार।
पड़ने लगें दरार, हुआ तकनीकी मानव।
उसे नहीं स्वीकार, हार या कहीं पराभव।
’आकुल’ का यह छंद, कहानी दुखती रग की।
कई न पाते लौट, दौड़ में अंधी जग की।।
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