लता जी
के स्वर में अमरत्व था, वहीं आशा जी के स्वरों में सिद्धि का प्रकाश था। संगीत के सात सुरों में सा और पा अचल स्वर माने जाते हैं। शेष सुरों के कोमल व तीव्र स्वर होते हैं। बॉलिवुड में लता मंगेशकर संगीत का प्रथम स्वर ‘सा’ थीं तो आशा भौंसले पाँचवाँ स्वर ‘पा’ थीं। दोनों ही संगीत के अचल स्वर थीं। संगीत की अनेक विधाओं का एक अनोखा संगम रहा और इस संगम में गंगा और यमुना
की तरह इन दोनों के योगदान को कभी भी नहीं भुलाया जा सकेगा। शेष गायिकायें समय की धार में सरस्वती नदी की तरह उनमें समाती चलीं गईं।
सुर सामाज्ञी लता भारत रत्न थीं तो स्वर किन्नरी आशा भौंसलें सर्वोच्च पद्म पुरस्कार 'पद्म विभूषण' से सम्मानित थीं। ये दोनों पुरस्कार ही असाधारण और विशिष्ट सेेेवा के लिए दिया जाता है।दोनों ही आत्माएँ 92 वर्ष की उम्र में अनंत में विलीन हुईं।
आशा जी के गाये हजारों गीतों में सैंकड़ों गीत हैं, जो मुझे पसंद हैं, किंतु इन गीतों ने मेरे जीवन के संगीत में बहुत गहरा असर डाला है जिनसे, आशा जी को मेरे पसंदीदा उनके गीतों से उन्हें श्रद्धांजलि देता हूँ- तोरा मन दरपन कहलाए... फिल्म- काजल; कतरा कतरा ..... फिल्म- इजाजत; मेरा कुछ सामान.....फिल्म- इजाजत; . झुमका गिरा रे.....फिल्म– मेरा साया; चुरा लिया है तुमने.....फिल्म- यादों की बारात; पिया तू अब तो....... फिल्म- अपना देश; दिल जलों का दिल जला के.... फिल्म- डॉन; दिल चीज क्या है...फिल्म- उमरावजान; दम मारो दम......फिल्म- हरे राम हरे कृष्ण; मुझको हुई न खबर..... फिल्म- कुछ कुछ होता है; तू रूठा तो मैं..... फिल्म- जवानी; प्यार करने वाले..... फिल्म– शान; ओ मेरी जान....... फिल्म- सनम तेरी कसम; जाइए आप कहाँँ जाएँगे.... फिल्म- मेरे सनम; आओ हुजूर तुमको सितारों में ले चलूँ.... फिल्म- किस्मत आदि।
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