11 अप्रैल 2026

घर में रहती शांति, मिल जुल कर हम यदि रहें

छंद- सोरठा 
विधान- दोहे का हूबहू विपरीत यानि 11, 13 पर यति। 
अपदांत 
समांत- ऊकारांत इए 

गीतिका
फूले मगर न श्‍वास, धीरे धीरे घूमिए।
मन का बनें न दास, करना योग न भूलिए।

घर में रहती शांति, मिल जुल कर हम यदि रहें,
रहती कभी न भ्रांति, नहीं बड़ों से रूठिए। 

बच्‍चे वृद्ध जवान, घूमें नित्‍य शाम सुबह,    
घूमें उस दौरान,  कई समस्‍या बूझिए।।

आता सबका दौर, कभी न हारें उम्र से,
करना यह भी गौर, खुशियों को बस ढूँढिए।

जीएँ रख विश्‍वास, मरना शाश्‍वत सत्‍य है,
कर जायें कुछ खास, फिर जीवन से छूटिए।।

सबका रखना मान, सुख-दुख तो मेहमान हैं,
जिएँ सदा यह जान, समदर्शी बन पूजिए ।।

छल प्रपंच से दूर, ‘आकुल’ की यह सीख रह,
क्‍यों कर तनिक सबूर, खुद से थोड़ा पूछिए ।। 

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