17 मार्च 2026

परम्‍पराएँँ बेमानी सी लगती हैं

 (प्रदत्त शब्द- परम्परा, रीति, रिवाज, प्रथा)

छंद- कुकुभ (मात्रिक)
विधान- मात्रा भार-30. 16, 14 पर यति, अंंत 2 गुरु से ।
पदांत- सी लगती हैं
समांत- आनी
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अंकुश ना हो #परम्पराएँ, बेमानी सी लगती हैं।
भावुकता में बही जिंदगी रूमानी सी लगती हैं ।1।
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कर गुजरें फिर इक दिन अपने और पराये मिल जाते,
#रीति_रिवाज_प्रथाएँ सब तब बेगानी सी लगती हैं।2।
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पल में बनते रिश्ते, उगते हैं सपनों के #डेफोडिल,
टूटें दिल तो बिना लकीरें पेशानी सी लगती हैं।3।
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बदलें ताशों के पत्तों सी दाँव लगाते रिश्तों को,
अनपढ़ नादानों के जैसी बचकानी सी लगती हैं।4।
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परम्परायें नहीं ढाई’ दिन, के झौंपड़ सी हैं 'आकुल' ,
ढाई आखर प्रेम फले तो आसानी सी लगती हैं ।5।
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डेफोडिल- एक चमकीले पीले या सफेद रंग का वसंत ऋतु में खिलने वाला फूल है, जो नई शुरुआत, आशा, पुनर्जन्म और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

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