छंद- शास्त्र (मात्रिक)
मापनी- 1222 1222 1221
पदांत- हाथ
समांत- अने
कभी क्यो खूँ-खराबे में, सने हाथ।
भलाई के लिए कोई, बने हाथ।
न खाली बैठता कोई हुनरमंद,
न देना वक्त पे, तू बहकने हाथ।
न कर पाए भलाई तो न कर फिक्र,
बढ़ायेंगे जमाने में घने हाथ।
कभी जज्बात नेकी के न हों खत्म
सिला नेकी दिलाती सामने हाथ।
जहाँ में मौत आती वक्त बे वक्त,
चलें 'आकुल' किसी का साधने हाथ।।
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