निबंध
| Vande Bharat Train |
जेम्सवाट के भाप के इंजन से चल कर वर्तमान में सोलर से चलने तक विश्व में मैग्लैभी ट्रेन, बुलैट ट्रेन, इलेक्ट्रिक ट्रेन, ट्राम, मेट्रो ट्रेन का सफर तय करती हुई रेलवे विश्व को सुख सुविधाओं के साथ एवं माल परिवहन के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक त्वरित पहुँचाने के कार्य में प्रवृत्त है।
विश्व
में ‘वसुधैवकुटुम्बकम्’ की संकल्पना को जिन दो क्षेत्रों के भारतीयों की अभूतपूर्व
उपलब्धियों पर दृष्टि डालें तो हमें गर्व है कि हमारी भारतीय संस्कृति का यह वाक्यांश
हमारी सार्थक संस्कृति का केंद्रबिंदु है। एक है नोबेल पुरस्कार और दूसरा है
भारतीय रेल। जहाँ साहित्य, भौतिकशास्त्र, रसायन शास्त्र, चिकित्सा,
अर्थशास्त्र और शांति के क्षेत्र में 9 नोबेल पुरस्कार पाने का गौरव हमें प्राप्त
है, वहीं भारतीय रेलवे इस संकल्पना को साकार करने वाला विश्व में पहला उद्यम है।
भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी मालवाहक और यात्री परिवहन सेवा है,
जो
अर्थव्यवस्था को गति देने और देश भर में लोगों को बिना भेदभाव के जोड़ने की
महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारतीय रेलवे का लंबाई के परिप्रेक्ष्य में भले ही
विश्व में अमेरिका, चीन और रूस के बाद चौथा स्थान है, किंतु यात्रियों की दृष्टि
से भारतीय रेल का विश्व में सबसे
बड़ा और पहला स्थान है। भारतीय रेल हमारी
अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। रेलवे देश के विभिन्न
हिस्सों को जोड़कर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देती है और गरीबों के लिए यात्रा का
सबसे सुलभ साधन प्रदान करती है। भारतीय रेलवे दुनिया का नौवाँ और
भारत का सबसे बड़ा नियोक्ता है और यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों
को रोजगार प्रदान करती है। माल ढुलाई से रेलवे को सबसे अधिक राजस्व प्राप्त होता
है, जो देश की जीडीपी का 1.5
प्रतिशत है। इसके बाद यात्री सेवा से सर्वाधिक
कमाई होती है।
रेलवे का क्रमिक विकास -
भारतीय
रेलवे द्वारा संचालित ट्रेनों की कुल संख्या बदलती रहती है। नवीनतम आंकड़ों के
अनुसार,
अनुमानत:
2024 में एक दिन में देश में 3 करोड़ से अधिक लोगों ने यात्रा की। देश में लगभग 22,593 ट्रेनें
चलती हैं,
जिनमें
से 13,452
यात्री
ट्रेनें हैं और बाकी मालगाड़ियाँ हैं।
भारतीय रेल अपनी विशाल नेटवर्क के माध्यम से रेलमार्ग प्रबंधन करता है, जिसमें बुनियादी ढांचे का
विस्तार, प्रौद्योगिकी का एकीकरण और
रणनीतिक योजना शामिल है। इसमें यात्री और मालगाड़ी सेवाओं का कुशल संचालन, सिग्नलिंग प्रणाली, स्टेशनों का आधुनिकीकरण, ऑनलाइन
टिकटिंग और इंटरनेट बुकिंग और सुरक्षा मानकों को बढ़ाना शामिल है।
भारतीय रेलवे के क्रमिक विकास को संक्षेप में हम इस प्रकार वर्गीकृत कर सकते
हैं-
1. लॉर्ड डलहौजी को भारतीय रेलवे का जनक माना
जाता है, जिन्होंने
1853 में भारत में रेलवे की शुरुआत की।
2. फेयरी क्वीन दुनिया के पहले और सबसे पुराने काम करने वाले इंजनों में से एक था जो अभी भी काम कर रहा है। 1998 में, यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज की गई थी । फेयरी क्वीन उसी मार्ग पर चलती है जिस पर पैलेस ऑन व्हील्स , जो 1982 में शुरू की गई पर्यटक ट्रेन थी, और 1999 में जिसे राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
3. 1855 और 1860 के बीच पैसेंजर लाइन का निर्माण और संचालन ग्रेट इंडियन
पेनिनसुला रेलवे (GIPR) द्वारा किया गया था। 1888 में, भारत के पहले रेलवे स्टेशन बोरीबंदर का पुनर्निर्माण किया गया
और रानी विक्टोरिया के सम्मान में इसका नाम बदलकर विक्टोरिया टर्मिनस कर दिया गया।
रेलमार्गों को ब्रॉड गेज, मीटर गेज और नैरो गेज (पहाड़ी मार्गों और बच्चों के टॉय
व जॉय र्टेनों के लिए) ट्रैक बनाये गये। यात्रा
के इस शुरुआती युग को मुख्य रूप से निजी कंपनियों द्वारा ब्रिटिश संसद द्वारा बनाया
गया। कुल मिलाकर आठ रेलवे कंपनियां स्थापित की गईं, जिनमें ईस्टर्न इंडिया रेलवे, ग्रेट इंडिया पेनिनसुला कंपनी, मद्रास रेलवे, बॉम्बे बड़ौदा और सेंट्रल इंडिया रेलवे शामिल हैं। वर्तमान में
इन्हें बदल कर पश्चिम मध्य रेलवे मध्य रेलवे , दक्षिणपूर्व मध्य रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे आदि मिला कर भारत में कुल 18 जोनों में
विभाजित किया गया है, जिसमें से कोलकाता मेट्रो को 17वां
और दक्षिणी तट रेलवे को 18वां जोन बनाया गया है।
4. स्वतंत्रता के बाद 1951 में भारतीय रेलवे का राष्ट्रीयकरण किया गया ।
5. 1984 के बाद से, रेलवे के तेज़ परिवहन और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से
विकास हुआ है। आज भारत में कई
तरह की रेलें चलती हैं, जैसे जनशताब्दी, तेजस, दुरन्तो, सुपरफास्ट, पैलेस ऑन व्हील,
वंदे भारत, मेमो रेल, इलेक्ट्रिक लोकल ट्रेन, मेट्रो ट्रेन आदि। आने वाली रेल
सौगात के रूप में बुलेट ट्रेन भी योजना में है। ऑनलाइन टिकटिंग और इंटरनेट बुकिंग
की शुरुआत इसी दौर में हुई।
6. 1924 में, पहला रेल बजट पेश किया गया । भारत की
आजादी के बाद से सरकार ने हर साल रेल बजट बनाना शुरू किया। 24 मार्च
1994 को रेल बजट का
पहला सीधा प्रसारण हुआ। 2004 से 2009
तक,
रेल
मंत्री लालू प्रसाद यादव ने पहले और अपने पूरे कार्यकाल में छह बार बजट पेश किया। ममता
बनर्जी, पश्चिम
बंगाल की मुख्यमंत्री भारतीय इतिहास की
पहली महिला थीं, जिन्होंने 2000 में रेल
मंत्री का पद संभाला और 2002 में रेल
बजट पेश किया। वह दो अलग-अलग केंद्र सरकार यानी NDA और
UPA
के
लिए रेल बजट पेश करने वाली पहली महिला थीं।
7. जहाँ 1853 में, भारत में पहली यात्री ट्रेन बोरी बंदर से ठाणे तक चली। वहीं भारत में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन 3 फरवरी, 1925 को मुंबई के विक्टोरिया टर्मिनस (अब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस)
और कुर्ला हार्बर के बीच चली थी। यह भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, जिसने भाप से विद्युत कर्षण में बदलाव की शुरुआत की। भारत की पहली मेट्रो रेल कोलकाता में 24 अक्टूबर 1984 को शुरू हुई थी। कोलकाता ही एकमात्र शहर है जहाँ आज भी ट्राम चलती हैं। ट्राम की शुरुआत 19वीं सदी के अंत में कई शहरों में हुई थी, लेकिन 1933 और 1964 के बीच कोलकाता को छोड़कर अधिकांश शहरों में इन्हें बंद कर दिया गया था। त्वरित विकास के चरण के इसी क्रम में पहले मोदी मंत्रालय के दौरान, रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु थे जिन्होंने भारत की पहली वातानुकूलित डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट की शुरुआत की। 8. शेयर बाज़ार में भी भारतीय रेलवे के क्षेत्र का महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें रेलवे से जुड़ी कई
कंपनियाँ, जैसे IRFC, IRCTC, RVNL, और कंटेनर
कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, शामिल हैं। यह क्षेत्र सरकारी निवेश, आधुनिकीकरण और विस्तार योजनाओं के कारण लंबी अवधि के लिए एक
आकर्षक निवेश अवसर प्रदान करता है।
9. भारतीय रेलवे ने बचत बढ़ाने के उद्देश्य से सौर ऊर्जा से चलने वाली
ट्रेन के विकास की शुरुआत की। सौर ऊर्जा प्रति वर्ष 2.7 टन तक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है।
10. भारतीय रेलवे की सबसे तेज़ ट्रेन, “ट्रेन 18” या जिसे आमतौर पर ‘वंदे भारत’ के नाम से जाना जाता है, पूरी तरह से वातानुकूलित
कुर्सी वाली एक प्रतिष्ठित ट्रेन है और इसे सबसे पहले कानपुर और प्रयागराज के
माध्यम से दिल्ली से वाराणसी के बीच संचालित किया गया। अब यह लगभग सभी राज्यों के
रूटों पर चलती है। अपने टेस्ट रन में, यह मेक इन इंडिया पहल के तहत 180 किमी प्रति घंटे की यात्रा करने वाली एकमात्र स्वदेशी ट्रेन है।
लेकिन गति प्रतिबंधों के कारण, यह 130 किमी/घंटा की गति से चलने वाले रूट ट्रैक की अधिकतम गति सीमा से
अधिक नहीं हो सकता है।
भारतीय
रेल का भारतीय संस्कृति में योगदान –
भारतीय रेलवे विभिन्न भाषाओं,
रीति-रिवाजों
और खान-पान की आदतों वाले लोगों को एक साथ लाता है। यह
देश के विभिन्न कोनों से लोगों को मिलने और एक-दूसरे की संस्कृति को समझने का मौका
देता है। रेलवे ने विभिन्न समुदायों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक
आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया है। अंग्रेजों ने रेलवे का उपयोग
अपने शासन को मजबूत करने के लिए किया, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे राष्ट्रवाद और एकता को
बढ़ावा देने वाले एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया। महात्मा गांधी ने
कहा था कि रेलवे ने विविधता में एकता को संभव बनाया।
भारतीय रेलवे ने भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने इंजीनियरिंग और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दिया है, जो भारत के पर्वतीय रेलवे जैसे
विश्व धरोहर स्थलों में दिखाई देता है।
भारत
के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुँचने के लिए हमारा भारतीय रेलवे विभिन्न
पर्यटन स्थलों तक पहुँचाने वाला और ‘वसुधैवकुटुम्बकम्’ की अवधारणा को
तेजी से बढ़ाने वाला भारत का पहला उद्यम है, जो देशी और विदेशी पर्यटकों को हमारी
विश्वधरोहरों और पर्यटन स्थलों, बागों के लिए शिमला, कश्मीर, देहरादून और
धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के लिए भारत के समस्त प्रख्यात स्थलों को देखने
के लिए आकर्षक पैकेज प्रदान करता है।
1910
में प्रकाशित एक स्केचबुक की कहानी ‘भारतीय रेलवे में खराब उपनिवेशवाद और अच्छे राष्ट्रवाद’
शीषर्क पर लिखे लेखक ‘भविष्य गोयल’ के व्यंग्य को छोड़ दें और वर्तमान
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विचारों पर गौर करें- ‘’यह विकास भारतीय रेल्वे की आधुनिक समृद्धि एवं आर्थिक
समृद्धि के इको सिस्टम को बढ़ावा देंगे, रेलवे संचालन को बढ़ाएंगे, अधिक निवेश के अवसर पैदा करेंगे और नए रोजगार सृजित करेंगे।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वंदे भारत ट्रेनें, अमृत भारत स्टेशन और नमो भारत रेलों ने भारतीय रेलवे के लिए नए
मानक स्थापित किए हैं’’ , तो हमें जीवंतता
के दर्शन होंगे ।
हमें भारतीय रेल की धर्मनिरपेक्षता और उसकी निरंतर प्रगति पर
गर्व होना चाहिए। इस प्रकार हम
कह सकते हैं कि वर्तमान भारतीय रेलवे देश के आर्थिक विकास और भारतीय सांस्कृति को
एक दृढता प्रदान करती है। यह हमारी सर्वधर्म समभाव, वैश्विक एकता और आधुनिक संस्कृति
की जीवंतता का वाहक है।
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