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11 अप्रैल 2026

न मन के मुताबिक चली जिंदगी है

 छंद- भुजंग प्रयात

मापनी- 122 122 122 122

समांत- अरना

अपदांत

 

कही बात पर तुम सदा ही ठहरना ।

लिया हाथ में तो नहीं फिर मुकरना ।।

 

नहीं काम होते कई बिन हुनर के,

अगर कर सको तुम तभी हाथ धरना ।

 

न पाना उसे जो न हक़ में तुम्‍हारे,

न कोशिश ही’ करना न हद से गुजरना ।

 

न मन के मुताबिक चली जिंदगी है,

तुम्‍हें ही मुताबिक उसी के सुधरना ।


न काबिल सदा ए‍क दिन हों मुकाबिल,

इसी हौसले से सदा तुम निखरना ।।  

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