सान्निध्य
दोस्त फ़रिश्ते होते हैं. बाक़ी सब रिश्ते होते हैं.
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मुख्यपृष्ठ
1- 'जीवन की गूँज' से
2- मेरी लघु कथाएँ
3- मेरे प्रिय कवि और उनकी कवितायें
4- 'जीवन की गूँज' लोकार्पण पर कृति परचिय, कृतिकार परिचय, वक्ताओं के आलेख और विचार
5- 'जीवन की गूँज' से
6- लघुकथा कहानी की निकटतम विधा है, उसका साररूप नहीं
7- मेरा शहर 'कोटा'
8. नवगीत - कुछ यक्ष प्रश्न और मेरे विचार
9. नवगीत - कुछ यक्ष प्रश्न और मेरे विचार
10. शुद्धता और स्वच्छता के उच्च मानकों पर ही स्थापित है पुष्टिमार्गीय सम्प्रदाय
11. सहज संवेदनशील अनुभवों का पिटारा है “अँजुरी भर सितारे”
12. जीने की लालसा जगाती 'ढलती हुई धूप'
13. पुस्तक लोकार्पण- चलो प्रेम का दूर क्षितिज तक पहुँचाएँ संदेश
14. राजस्थान राज्य का हिन्दी साहित्य
15. समीक्षाकार श्री विजय जोशी की संक्षिप्त विवेचना 4 पुस्तकों पर
16. समीक्षा- जब से मन की नाव चली (नवगीत संग्रह )- आचार्य संजीव सलिल
17. हौसलों ने दिए पंख (गीतिका द्विशतक ) पुरोवाक्
18. छन्द और दोहा परिवार
19. 'चलो प्रेम का दूर क्षितिज तक पहुँचाएँँ सन्देश' (गीतिका शतक) का समीक्षात्मक पुरोवाक्
20. सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय अस्मिता, प्राकृतिक परिवेश और मानवीय सम्वेदना की सार्थक प्रस्तुतियों का संकलन है 'प्रेम पुष्प'
21. बाल-काव्य बाल-मनोविज्ञान का दर्शन है
22. कुंडलिया छन्द विधान
23. अंधविश्वास
24. हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर 12 सितम्बर को 'इंद्रधनुष बन जाऊँ मैं' के विमोचन समारोह में 'आकुल' का वक्तव्य
25. परिचय पुस्तक ‘इंद्रधनुष बन जाऊँ मैं’ का और अपनी बात
26. एक नई दस्तक देनी है
27. भरतीय रेल: विकास, संस्कृति एवं जीवंतता का वाहक
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11 जून 2026
आओ मेघा हरियाली मरु में लाओ
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गीतिका छन्द- रास विधान- 22 मात्रीय सम मात्रिक छन्द- 8,8,6 पर यति। अपदान्त समान्त- आओ आओ मेघा, हरियाली मरु, में लाओ। हर घर, जन पथ, वृक्षावलिय...
9 जून 2026
सर्वधर्म समभाव बना कर रहना चाहिए
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गीतिका छन्द- गगनांगना विधान- 25 मात्रीय, 16, 9 पर यति, अन्त 212 पदान्त- चाहिए समान्त- अहना सर्वधर्म समभाव, बना कर, रहना चाहिए । स्वस्थ रहे...
24 मई 2026
मार्ग मध्यम ही करें सारे ग्रहण माँ शारदे
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छंद- गीतिका मापनी- 2122 2122 2122 212 पदान्त- माँ शारदे समान्त– अरण पट नयन खोलूँ सदा कर के स्मरण माँ शारदे। फिर करूँ खटकर्म सारे संस्क...
23 मई 2026
कितना सबको समझाएँँ
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छंद- पद (चौपाई परिवार) विधान- चौपाई + सार छंद से पूर्ति एवं शेष द्विपदियाँ सम तुकांत। कितना सबको समझाएँ । ढाई आखर प्रेम सत्य है, क्यों स...
जपो नित श्रीकृष्ण शरणं मम
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छंद- पद (चौपाई परिवार) विधान- चौपई + सार छंद से पूर्ति एवं शेष द्विपदियाँ सम तुकांत। जपो नित ‘श्रीकृष्ण शरणं’ मम । ध्यान लगाओ, समय निकाल...
22 मई 2026
जिस पर बीती मित्र, आफतें वह ही जाने
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छंद- रोला अपदांत समांत- आने जिस पर बीती मित्र, आफतें वह ही जाने। होनी टले न घात, कह गए सभी सयाने। बिल्ली काटे मार्ग, कहीं पर रोय...
17 मई 2026
ये रात भी हसीं है चंदा भी’ मुस्कुराए
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छंद- दिग्पाल (मानीबद्ध / मात्रिक) मापनी- 221 2122 221 2122 अपदांत समांत- आए ये रात भी हसीं है चंदा भी’ मुस्कुराए। चंदा व चांदनी से धरती भी...
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