पेज
▼
जो काया है
गीतिकाछंद- कन्या (वार्णिक)
मापनी- 2 222 (गुरु मगण) जो काया है।
वो छाया है।1।
प्रारब्धों की,
ही माया है।2।
कर्मों ने तो,
दौड़ाया है।3।
कर्तव्यों ने,
दी छाया है।4।
दायित्वों ने,
पौढ़ाया है।5।
संस्कारों से,
ही आया है।6।
संसारी तू,
हो पाया है।7।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें