पेज

22 मार्च 2013

आओ होली मनाएँ


आओ होली मनाएँ 

रंगों से
उमंगों से
उपजे प्रेम
प्रसंगों से
मिल हमजोली मनायें

कर बरजोरी
चोरी चोरी
गौरी कान्‍हा
कान्‍हा गौरी
रंग गालों पे लगायें

संग ढप चंग
पी कर भंग
झूमे टोली
मस्‍त मलंग
नाचें सबको नचायें

भूल दुश्‍मनी
कथनी करनी
आज सभी पे
चले कतरनी
गले लगें और लगायें

कोई न रूठें
खुशियाँ लूटें
रंगों की ही
मटकी फूटें
ऱंग बिरेंगे रंग जायें

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें